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छात्रों को संबोधित करते हुए गुप्ता ने एआई अर्थव्यवस्था, बढ़ती उत्पादकता और बदलते रोजगार बाजार पर बात की

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : “भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। हमारा उद्देश्य ऐसी तकनीक का लाभ उठाना होना चाहिए जो अवसरों को मजबूत करे, निष्पक्षता की रक्षा करे और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा दे” ये विचार दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष, विजेंद्र गुप्ता ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय के शहीद भगत सिंह कॉलेज के शैक्षणिक सभागार में ‘चुनौतियाँ और अवसर: एक आर्थिक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित तीसरे राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।

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इस सेमिनार में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक और मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य प्रो. राम सिंह के साथ-साथ शिक्षा और उद्योग जगत के अन्य गणमान्य वक्ता भी उपस्थित थे। कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों और छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

आर्थिक ढांचे का पुनर्निर्माण

अपने संबोधन में माननीय अध्यक्ष ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक संरचनात्मक आर्थिक शक्ति के रूप में विकसित हो चुकी है, जो उत्पादकता, श्रम बाजार, पूंजी आवंटन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नया आकार दे रही है। उन्होंने गौर किया कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं अब डेटा, एल्गोरिदम और कम्प्यूटेशनल क्षमता के इर्द-गिर्द पुनर्गठित हो रही हैं। एआई आज वित्तीय प्रणालियों, विनिर्माण, भविष्य कहने वाली विश्लेषिकी (प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स) के माध्यम से कृषि, स्वास्थ्य सेवा, रसद (लॉजिस्टिक्स) और सार्वजनिक प्रशासन को गहराई से प्रभावित कर रहा है।

भारत के लिए सामरिक लाभ

भारत को सबसे तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए गुप्ता ने कहा कि देश का डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और युवा जनसांख्यिकीय प्रोफाइल इस वैश्विक संक्रमण में भारत को एक रणनीतिक बढ़त दिलाता है। उन्होंने जोर दिया कि एआई कई क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाकर, बेहतर क्रेडिट मूल्यांकन के माध्यम से वित्तीय समावेशन को मजबूत करके और नवाचार को बढ़ावा देकर बड़े आर्थिक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि एआई से जुड़ी भूमिकाओं में वेतन और नौकरी की गुणवत्ता बेहतर हो रही है, जो भारत के युवाओं के लिए सार्थक अवसर है।

साथ ही, माननीय अध्यक्ष ने आगाह किया कि इस बदलाव को दूरदर्शिता और संतुलन के साथ प्रबंधित किया जाना चाहिए। उन्होंने नियमित कार्यों के स्वचालन (ऑटोमेशन) से होने वाले श्रम विस्थापन, बढ़ते कौशल अंतर (स्किल्स गैप) और डिजिटल विभाजन के खतरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “बड़े पैमाने पर रीस्किलिंग और अपस्किलिंग पहल, उद्योग-अकादमिक सहयोग और डिजिटल शिक्षा का विस्तार समय की मांग है। बाजार में विश्वास और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए नियामक स्पष्टता, डेटा गवर्नेंस और एल्गोरिदम की जवाबदेही अनिवार्य है।”

गुप्ता ने यह भी कहा कि एआई को अपनाने के व्यापक व्यापक-आर्थिक (मैक्रोइकॉनोमिक) निहितार्थ हैं जो वेतन संरचना, कराधान प्रणाली और दीर्घकालिक रोजगार पैटर्न को प्रभावित करते हैं। उन्होंने छात्रों को तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में खुद को ढालने, विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करने और नैतिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

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