सोशल संवाद / जमशेदपुर : अवैध निर्माण और नक्शा विचलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिलने के एक सप्ताह बाद अब झारखंड हाईकोर्ट ने भी राहत दी है। सोमवार को हाईकोर्ट की खंडपीठ चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर ने प्रतिवादी संख्या 13, साकची एसएनपी एरिया की कहकशा नाहिद के भवन में तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी।

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सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। साथ ही 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए दलील दी गई कि अवैध निर्माण से जुड़े कई मामलों में शीर्ष अदालत पहले ही स्टे दे चुकी है। इसी आधार पर तोड़फोड़ रोकने का अनुरोध किया गया, जिसे हईकोर्ट ने स्वीकार किया। मूल याचिकाकर्ता राकेश कुमार झा की ओर से अधिवक्ता निरंजन कुमार ने अदालत को याद दिलाया कि 14 और 28 जनवरी 2026 के आदेशों में
हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाया था और इन्हें प्रभावी रूप से लागू किया जाना जरूरी है। यह वही मामला है जिसमें तीन अधिवक्ताओं की समिति की रिपोर्ट के आधार पर जेएनएसी को अवैध भवनों को तोड़ने का निर्देश दिया गया था। चूंकि सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई भी 9 मार्च को ही निर्धारित है, ऐसे में यह आशंका है कि उसी दिन होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई फिलहाल टल सकती है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव के अनुसार, अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर हैं, जहां अगली दलीलों के आधार पर आगे की दिशा तय होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी को लगाई थी तोड़फोड़ पर रोक
अवैध निर्माण पर की जा रही कार्रवाई के दौरान शहर के कई भवन निर्माताओं ने SLP(C) No. 4741/2026, SLP(C) 4316-4318/2026 और डायरी No. 6356/2026 के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 2 फरवरी को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने नोटिस जारी करते हुए भवनों के किसी हिस्से को तोड़ने पर रोक लगा दी थी।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में होगा फैसला
अवैध निर्माण का मामला अब हाईकोर्ट से आगे बढ़कर सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा। शीर्ष अदालत में पूरे प्रकरण की मेरिट के साथ-साथ हाईकोर्ट द्वारा 24 भवनों के अवैध हिस्सों को तोड़ने के आदेश पर विस्तृत बहस होगी। इन 24 भवनों के निर्माता शहर के प्रभावशाली लोग हैं, जिन्होंने अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बचाने के लिए याचिका दायर कर हस्तक्षेप की मांग की है। 9 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई होगी। मालूम हो कि हाईकोर्ट ने आठ साल सुनवाई के बाद 24 भवनों की अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। फिलहाल भवन मालिकों को राहत मिली है, लेकिन आगे का अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के रुख और आदेश पर निर्भर करेगा।










