सोशल संवाद / डेस्क : देश की तकनीकी शिक्षा से जुड़ी सर्वोच्च संस्था AICTE ने एक अहम निर्णय लेते हुए अपने सभी मान्यता प्राप्त कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे वैदिक शिक्षा प्रणाली से पढ़े छात्रों को भी इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में अन्य बोर्ड के छात्रों के समान अवसर दें। इस फैसले के बाद तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नई बहस छिड़ गई है।

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AICTE ने यह सूचना देशभर के तकनीकी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, राज्य सरकारों और करीब 9,000 से अधिक मान्यता प्राप्त संस्थानों को पत्र जारी कर दी है।
किस बोर्ड को मिली मान्यता?
यह फैसला Maharshi Sandipani Rashtriya Ved Sanskrit Shiksha Board (MSRVSSB) से जुड़े छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है।
अब तक इस बोर्ड से पढ़े छात्र तकनीकी कोर्स, खासकर बीटेक में प्रवेश नहीं ले पाते थे। लेकिन AICTE के नए निर्देश के बाद स्थिति बदल गई है।
बोर्ड द्वारा जारी:
- ‘वेद भूषण’ प्रमाण पत्र को कक्षा 10 के समकक्ष
- ‘वेद विभूषण’ प्रमाण पत्र को कक्षा 12 के समकक्ष
मान लिया गया है।
AICTE के नए निर्देश क्या कहते हैं?
AICTE के अनुसार, यदि वैदिक बोर्ड से उत्तीर्ण छात्र इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता जैसे कक्षा 12 में भौतिकी, रसायन और गणित पूरी करते हैं, तो उन्हें प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता।
AICTE के सलाहकार एन.एच. सिद्धलिंगा स्वामी द्वारा 28 जनवरी को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया कि MSRVSSB से पास छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर दिया जाए।
साथ ही, Association of Indian Universities (AIU) पहले ही इस बोर्ड की योग्यता को मान्यता दे चुका है।
वैदिक शिक्षा का पाठ्यक्रम कैसा है?
MSRVSSB का पाठ्यक्रम मुख्य रूप से वेदों पर आधारित होता है। इसमें:
- वेद मंत्रों और श्लोकों का अध्ययन
- शुद्ध उच्चारण पर जोर
- अर्थ और व्याख्या की समझ
इसके अलावा गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान और कंप्यूटर की भी शिक्षा दी जाती है। हालांकि, पारंपरिक शिक्षा पद्धति की तुलना में इसमें रटने और उच्चारण को अधिक महत्व दिया जाता है।
सरकार की मान्यता भी मिली
Ministry of Education ने भी MSRVSSB को नियमित स्कूल बोर्ड के रूप में मान्यता प्रदान की है। इसके तहत जारी प्रमाण पत्र अब अन्य केंद्रीय और राज्य बोर्डों के प्रमाण पत्रों के बराबर माने जाएंगे।
खाली सीटें भी हो सकती हैं कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, हर साल इंजीनियरिंग कॉलेजों में 30% से 40% सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में निजी संस्थान वैदिक बोर्ड के छात्रों को प्रवेश देने में रुचि दिखा सकते हैं।
हालांकि, कुछ शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सीटें भरने में मदद मिलेगी, लेकिन तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
AICTE का यह निर्णय वैदिक शिक्षा पद्धति से जुड़े छात्रों के लिए नए अवसर खोलता है। अब वे भी तय योग्यता पूरी करने पर इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी कोर्स में दाखिला ले सकेंगे। यह कदम शिक्षा प्रणाली में समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इसके प्रभाव को लेकर चर्चा जारी है।










