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Kolhan में आदिवासी जमीन छीने जाने का आरोप, सरकार पर चम्पाई सोरेन का तीखा हमला

By Aditi Pandey

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Allegations of tribal land being snatched in Kolhan

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सोशल संवाद/डेस्क: Kolhan क्षेत्र में आदिवासी किसानों की जमीन छीने जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पलामू प्रमंडल में कोयला खनन से हुए पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के नाम पर कोल्हान के शेड्यूल एरिया में आदिवासियों की जमीन जबरन ली जा रही है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

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चम्पाई सोरेन ने बताया कि 24 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में पश्चिम सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत उदाजो में 271.92 एकड़ भूमि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड को वनारोपण के लिए दी गई। इसके बाद 23 दिसंबर की बैठक में फिर 559 एकड़ जमीन कंपनी को सौंप दी गई, जिसमें बोकना, जेटेया, डूमरजोवा, बम्बासाई और टोंटो के नीमडीह क्षेत्र की जमीन शामिल है। सरकार का तर्क है कि यह भूमि पलामू के चकला कोल ब्लॉक में इस्तेमाल की गई वन भूमि के बदले दी गई है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब पर्यावरण को नुकसान पलामू में हुआ है, तो उसकी भरपाई वहीं क्यों नहीं की जा रही। शेड्यूल एरिया में आदिवासियों की खेती योग्य जमीन को चुनना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से इन जमीनों पर खेती और पशुपालन करते आ रहे हैं, और जमीन जाने से उनकी आजीविका संकट में पड़ जाएगी।

चम्पाई सोरेन ने यह भी आरोप लगाया कि बिना ग्राम सभा की अनुमति और बिना किसी विस्थापन नीति के यह निर्णय लिया गया है। साथ ही, सारंडा वन क्षेत्र को वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी घोषित करने के फैसले पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि वन्य जीवों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन वहां रहने वाले लगभग 75 हजार आदिवासियों की आजीविका, धार्मिक स्थल और सामाजिक पहचान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने खदानों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन आदिवासियों के अधिकारों के लिए एक शब्द भी नहीं कहा। पेसा अधिनियम को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कैबिनेट से पास होने के बावजूद उसका ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं किया गया, जो संदेह पैदा करता है।

चम्पाई सोरेन ने चेतावनी दी कि आदिवासी अधिकारों की अनदेखी और जमीन छीने जाने की नीति का विरोध जारी रहेगा और कोल्हान की धरती से फिर उलगुलान होगा।

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