सोशल सांवड / डेस्क : अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, झारखंड प्रांत के तत्वावधान में मंगलवार को जुगसलाई स्थित होटल मेरेडियन में “भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System)” विषय पर एक ज्ञानवर्धक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन क्षेत्र संगठन मंत्री शिवाजी क्रांति के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश कराते हुए क्षेत्र संगठन मंत्री शिवाजी क्रांति ने राष्ट्रप्रेरक गीत की पंक्ति “चिर पुरातन राष्ट्र का, फिर से नया निर्माण हो”का भावपूर्ण वाचन किया। इस पंक्ति के माध्यम से उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की अखंडता, राष्ट्रनिर्माण में उसकी भूमिका तथा सांस्कृतिक चेतना को प्रभावी रूप से रेखांकित किया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता आदरणीय के. ई. एन. राघवन ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है। शिक्षा, संस्कृति, समाज व्यवस्था और जीवन मूल्यों में इसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
अपने उद्बोधन में राघवन ने छांदोग्य उपनिषद में वर्णित श्वेतकेतु की कथा का उल्लेख करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि श्वेतकेतु ने गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त कर स्वयं को ज्ञानी समझ लिया था, किंतु उनके पिता उद्दालक ने उनसे प्रश्न किया कि क्या उन्होंने वह ज्ञान प्राप्त किया है, जिसे जान लेने से सब कुछ जाना जा सके। बीज और वटवृक्ष के उदाहरण के माध्यम से उद्दालक ने समझाया कि सूक्ष्म तत्व ही समस्त सृष्टि का आधार है। अंत में उन्होंने “तत्त्वमसि” का महावाक्य कहकर आत्मा और ब्रह्म की एकता का बोध कराया।
कार्यक्रम का संचालन प्रांत उपाध्यक्ष एंजेल उपाध्याय जी ने किया तथा संगठन मंत्र प्रांत संगठन मंत्री प्रभु द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रांत महिला आयाम प्रमुख रूबी लाल जी ने अतिथियों का परिचय एवं स्वागत किया, जबकि विषय प्रवेश क्षेत्रीय संगठन मंत्री शिवाजी क्रांति जी के द्वारा कराया गया।
इसके पश्चात जिज्ञासा समाधान सत्र आयोजित हुआ, जिसमें उपस्थित लोगों ने अपने प्रश्न रखे और मुख्य वक्ता ने विस्तार से उनके समाधान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में प्रांत अध्यक्ष डॉ. कल्याणी कबीर जी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया । समापन में सामूहिक रूप से शांति मंत्र का वाचन किया गया।
इस अवसर पर प्रांत कोषाध्यक्ष चंद्रकांत बनर्जी, पर्यावरण आयाम प्रमुख डॉ. अनीता जी, महिला आयाम प्रमुख रूबी लाल जी, डॉ. डी. पी. शुक्ला, रंजय कुमार राय, शंभू, चंद्रेश्वर खां, रोहित, प्रीति, वंदना, अंकेश, रौशन, हर्ष, सुकुमार, श्वेता मेहता, पूनम सिंह, कृष्ण मुरारी, सुश्री रिया कुमारी, सुश्री बी. प्रियंका तथा बी. पी. कुमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।









