सोशल संवाद/डेस्क: नगर परिषद चक्रधरपुर में आगामी 14 मार्च को प्रस्तावित उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर अंजुमन इस्लामिया चक्रधरपुर की ओर से शहर के सभी वार्ड पार्षदों से भावनात्मक एवं सौहार्दपूर्ण अपील की गई है कि इस पद के लिए चुनावी प्रतिस्पर्धा की स्थिति बनने के बजाय आपसी सहमति एवं सामाजिक संतुलन की भावना के साथ सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाए।
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अंजुमन इस्लामिया की ओर से कहा गया है कि चक्रधरपुर की राजनीति में हमेशा सामाजिक सौहार्द और संतुलन की परंपरा रही है। लगभग वर्ष 1978 के आसपास जब रूद्र प्रताप सारंणी नगर पालिका के अध्यक्ष बने थे, उस समय मुस्लिम समाज से मोहम्मद सरफुद्दीन को उपाध्यक्ष बनाया गया था। यह परंपरा चक्रधरपुर की समावेशी राजनीति और सामाजिक भाईचारे की मिसाल रही है।
अंजुमन इस्लामिया ने यह भी बताया कि इस विषय पर माननीय सांसद श्रीमती जोबा मांझी जी एवं माननीय विधायक श्री सुखराम उरांव जी से भी समर्थन और मार्गदर्शन का अनुरोध किया गया है, ताकि नगर परिषद में सामाजिक संतुलन और आपसी विश्वास की भावना को मजबूत किया जा सके।
संस्था की ओर से यह भी कहा गया है कि नगर परिषद के उपाध्यक्ष पद की भूमिका मुख्यतः सहयोगात्मक होती है और यह पद शहर की एकता एवं सामूहिक नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यदि इस पद के लिए आपसी सहमति से निर्णय लिया जाए तो यह शहर में सकारात्मक संदेश देगा और अनावश्यक चुनावी प्रतिस्पर्धा या खरीद-बिक्री जैसी संभावनाओं को भी समाप्त करेगा।
अंजुमन इस्लामिया चक्रधरपुर की ओर से सभी समुदायों के वार्ड पार्षदों से विनम्र अपील की गई है कि शहर की सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे की भावना को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम समाज के किसी एक निर्वाचित वार्ड पार्षद को सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष पद के लिए समर्थन प्रदान करें।
यह निर्णय न केवल सामाजिक संतुलन को मजबूत करेगा बल्कि चक्रधरपुर की उस पुरानी परंपरा को भी आगे बढ़ाएगा, जिसमें सभी समुदायों को सम्मानजनक भागीदारी मिलती रही है।









