सोशल संवाद/डेस्क: बिहार अब खेलों के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार और केंद्र के सहयोग से खेलों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए कई अहम पहल की जा रही हैं। केंद्रीय खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने कहा है कि बिहार आने वाले समय में देश का नया ‘स्पोर्ट्स हब’ बन सकता है। उन्होंने बताया कि गांव-गांव खेल मैदान और छोटे स्टेडियम तैयार करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।

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इस पहल की खास बात यह है कि इसे मनरेगा जैसी योजना के जरिए लागू किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। बिहार का यह ‘विलेज स्पोर्ट्स मॉडल’ अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है और केंद्र सरकार ने भी इसे पूरे देश में अपनाने का संकेत दिया है।
राज्य अब खेलों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि इसे विकास, रोजगार और पहचान के एक मजबूत माध्यम के रूप में देख रहा है। आधुनिक सुविधाओं और स्पोर्ट्स साइंस के जरिए खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने पर जोर दिया जा रहा है।
वहीं बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की है कि यदि भारत को 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिलती है, तो बिहार को भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी का मौका दिया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम और बुनियादी ढांचे तैयार हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के कुछ मुकाबलों को बिहार में आयोजित कराने का प्रस्ताव भी रखा है, जिससे राज्य को वैश्विक पहचान मिल सके। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवींद्रण शंकरण ने बताया कि बिहार का खेलों से जुड़ाव ऐतिहासिक रहा है। उन्होंने कहा कि एक समय पर Indian Olympic Association का मुख्यालय भी बिहार में था, जिसकी अध्यक्षता जमशेदजी टाटा कर चुके हैं।
कॉनक्लेव में अभिनव बिंद्रा और डोला बनर्जी जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। खिलाड़ियों के अनुभवों ने युवाओं को नई दिशा और प्रेरणा दी। बिहार अब खेलों के जरिए एक नई पहचान गढ़ने की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह देश के स्पोर्ट्स मैप पर एक मजबूत केंद्र बनकर उभर सकता है।









