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झारखंड में गहराया ब्लड संकट, अस्पतालों में कमी से मरीजों को रिप्लेसमेंट डोनर पर मिल रहा खून

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। राज्य के कई ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी देखी जा रही है, जिसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी Ranchi के प्रमुख अस्पतालों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है और मरीजों को जरूरत के समय आसानी से खून नहीं मिल पा रहा है।

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राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल Rajendra Institute of Medical Sciences यानी रिम्स में ब्लड स्टॉक तेजी से घट रहा है। यहां मरीजों को खून देने के लिए अब रिप्लेसमेंट डोनर लाने की शर्त रखी जा रही है। यानी जिस ब्लड ग्रुप की जरूरत है, उसी ग्रुप का डोनर अस्पताल लाना पड़ रहा है, तभी मरीज को खून उपलब्ध कराया जा रहा है।

मौजूदा समय में रिम्स ब्लड बैंक में पॉजिटिव ग्रुप के खून का सीमित स्टॉक ही बचा है। जानकारी के अनुसार ए पॉजिटिव के करीब 20 यूनिट, बी पॉजिटिव के लगभग 22 यूनिट, ओ पॉजिटिव के करीब 30 यूनिट और एबी पॉजिटिव के सिर्फ सात यूनिट उपलब्ध हैं। वहीं निगेटिव ग्रुप के खून की स्थिति और भी गंभीर है, जहां सिर्फ ए निगेटिव की चार यूनिट ही मौजूद बताई जा रही हैं।

दूसरी ओर Sadar Hospital Ranchi में भी हालात ज्यादा बेहतर नहीं हैं। यहां ए पॉजिटिव की दो यूनिट, बी पॉजिटिव की तीन यूनिट, ओ पॉजिटिव की तीन यूनिट और एबी पॉजिटिव की केवल एक यूनिट ही बची है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस अस्पताल के ब्लड बैंक में किसी भी ग्रुप का निगेटिव ब्लड उपलब्ध नहीं है।

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन भी ब्लड की मांग लेकर रिम्स पहुंचने लगते हैं। ऐसे में पहले से कम स्टॉक होने के कारण सरकारी अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और कई बार मरीजों के परिजनों को खुद ही डोनर का इंतजाम करना पड़ रहा है।

इस मामले में Jharkhand High Court ने पहले ही निर्देश जारी किया था कि राज्य के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में रिप्लेसमेंट डोनेशन की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। 18 दिसंबर 2025 को जारी इस आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी ब्लड बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मरीजों को रिप्लेसमेंट डोनर लाने के लिए मजबूर न किया जाए।

इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात अलग दिखाई दे रहे हैं। कई मामलों में मरीजों के परिजनों को उसी ग्रुप का डोनर ढूंढकर लाना पड़ रहा है, तभी उन्हें खून मिल पा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि राज्य में स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। Jharkhand AIDS Control Society के निदेशक छवि रंजन के अनुसार, लक्ष्य यह है कि अस्पतालों में आने वाले करीब 90 प्रतिशत जरूरतमंद मरीजों को स्वैच्छिक रक्तदान के जरिए खून उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं रिप्लेसमेंट डोनेशन की शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल झारखंड में ब्लड की कमी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अधिक से अधिक लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं, तो इस संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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