सोशल संवाद/डेस्क: आस्था का महापर्व चैती छठ की शुरुआत चैत्र शुक्ल चतुर्थी, 22 मार्च को प्रथम संयम नहाय-खाय से होगी. व्रति प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर छठ व्रत के निमित्त नहाय-खाय का विधान पूर्ण करेंगे. इसके लिए सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 7:21 से 11:52 बजे तक है, आचार्य एके मिश्र ने बताया कि व्रत का द्वितीय संयम खरना (लोहंडा) चैत्र शुक्ल पंचमी, 23 मार्च को है.

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इस दिन व्रती प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर पूजन कक्ष की सफाई करते हैं. दिनभर निर्जला उपवास रखते हुए सूर्यास्त के उपरांत खरना के निमित्त पवित्रता के साथ अरवा चावल, गुड़, दूध से खीर, विभिन्न प्रकार के पकवान बनायेंगी. और शांति के साथ खरना का विधान संपन्न करेंगी. खरना का सर्वोत्तम मुहूर्त संध्या 6:20 से 8:53 बजे है.
महापर्व का तृतीय संयम चैत्र शुक्ल षष्ठी, 24 मार्च को अस्ताचलगामी सूर्यदेव को अर्घ अर्पित किया जायेगा. इसके लिए सर्वोत्तम मुहूर्त संध्या 4:34 से 5:56 बजे तक है. स्थानीय समय के अनुसार संध्या 5:56 बजे सूर्यास्त होगा.
इस दिन सुबह आम की लकड़ी पर ठेकुआ व अन्य पकवान बनता है. छठी मैया का गीत गाते हुए अर्थ देने के लिए व्रती अपने परिजन के साथ नियत स्थान पर पहुंचते हैं. चैत्र शुक्ल सप्तमी, 25 मार्च को उदित होते सूर्यदेव को अर्घ दिया जायेगा. इसके लिए सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 5:46 से 7:22 बजे तक है. सुबह 5:46 बजे सूर्योदय होगा. व्रती अर्थ के बाद और अपने कुलाचार विधि से व्रत का पारण करेंगी. वैसे सुबह 8:48 बजे से पूर्व पारण कर लेना चाहिए.









