---Advertisement---

बोकारो में विस्थापितों पर चंपई सोरेन का अल्टीमेटम, बोले- नहीं मिला हक तो खाली जमीन पर चलेगा हल

By Aditi Pandey

Published :

Follow
Champai Soren issues ultimatum बोकारो

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद/डेस्क: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर विस्थापितों का मुद्दा गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपई सोरेन ने बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) से जुड़े हजारों विस्थापित परिवारों की समस्याओं को लेकर राज्य सरकार और प्लांट प्रबंधन को डेढ़ महीने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए साफ चेतावनी दी है कि अगर अप्रेंटिसशिप पूरा कर चुके युवाओं को नौकरी नहीं दी गई और विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

यह भी पढ़ें: असम में हेलीपैड नहीं मिला, कल्पना सोरेन की रैलियां रद्द; फोन से दिया संदेश, सरकार पर हमला

चंपई सोरेन ने अपने पोस्ट में 1960 के दशक में हुए भूमि अधिग्रहण का जिक्र करते हुए बताया कि बीएसएल के लिए करीब 34 हजार एकड़ जमीन ली गई थी, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा आज भी खाली पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिग्रहण के समय किए गए वादे पूरे नहीं किए गए, न ही विस्थापितों को पूरा मुआवजा मिला और न ही उन्हें रोजगार के अवसर दिए गए। उनका कहना है कि हजारों परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब दशकों बीत जाने के बाद भी जमीन का पूरा उपयोग नहीं हो पाया, तो उसे मूल रैयतों को वापस क्यों नहीं किया जा रहा। उनका मानना है कि अगर जमीन लौटाई जाती है, तो लोग खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर बिना स्पष्ट अनुमति के व्यावसायिक निर्माण जैसे मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खड़े किए जा रहे हैं, जो कई सवाल खड़े करते हैं।

चंपई सोरेन ने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो लाखों लोग रैयतों के साथ मिलकर बोकारो स्टील प्लांट की खाली पड़ी जमीन पर हल चलाने उतरेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चांडिल, मसानजोर, मैथन और अन्य परियोजनाओं से जुड़े विस्थापितों के मुद्दे भी इसी तरह आंदोलन के जरिए उठाए जाएंगे।

फिलहाल इस पूरे मामले पर राज्य सरकार और बीएसएल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन चंपई सोरेन का यह बयान अब झारखंड की राजनीति में नई बहस और हलचल पैदा कर रहा है।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---