सोशल संवाद/डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर गुरुवार को चिंता जताई। कहा कि जागरूकता अभियान और लगातार खबरें आने के बावजूद शिक्षित लोग भी इन घोटालों का शिकार कैसे हो रहे हैं। CJI सूर्यकांत ने कहा- हम हैरान हैं कि लोग समझ क्यों नहीं रहे हैं? पीड़ितों के साथ क्या गलत है? क्या वे सामान्य लोग नहीं हैं? ये बात मीडिया में हर जगह है। अगर आपको लगता है कि आप मोबाइल पर अरेस्ट हो रहे हैं तो मोबाइल को दीवार पर मारें और गिरफ्तारी खत्म हो जाएगी।
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2026 में देश में डिजिटल अरेस्ट के 22 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए। साइबर अपराधियों ने लोगों से 800 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी की है। वहीं, 2025 में डिजिटल अरेस्ट के 58,239 केस सामने आए थे और करीब 1211 करोड़ रुपए की रकम ठगी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट बोला- ठगी को रोकने के लिए 5 बड़ी बातें
1. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि केवल घटना के बाद रिपोर्ट तैयार करना पर्याप्त नहीं है, ठगी को रोकने के लिए पहले से इंतजाम जरूरी हैं।
2. अगर बैंक की लापरवाही के कारण साइबर ठगी होती है, तो बैंक पीड़ित को मुआवजा दें और जिम्मेदारी तय होने पर कार्रवाई का सामना करें। यह अभी प्रस्ताव है, अंतिम आदेश नहीं।
3. खाते में असामान्य लेन-देन होने पर बैंक उसे वेरिफाई तक अस्थायी रूप से क्यों नहीं रोक सकते। संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जांच और उसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को दी जाए।
4. RBI के प्रस्तावित नियमों में उन मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने का प्रावधान होना चाहिए, जहां वित्तीय संस्थान जरूरी सावधानी बरतने में विफल रहे हों। अदालत ने RBI से अधिकृत वित्तीय संस्थानों की सूची भी मांगी।
5. सुप्रीम कोर्ट ने RBI से प्रस्तावित KYC संशोधन निर्देश, 2026 की समीक्षा करने और सभी अधिकृत वित्तीय संस्थानों की सूची पेश करने को कहा।
सरकार का पक्ष- पीड़ित मानसिक दबाव में रुपए दे देते हैं
एमिकस क्यूरी और सीनियर एडवोकेट एनएस नप्पिनई ने बताया कि हाल ही में एक महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.5 करोड़ रुपए की ठगी हुई।
उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के डर से लोग मानसिक दबाव में आकर ठगों के निर्देश मान लेते हैं और अपनी जमा-पूंजी गंवा बैठते हैं।










