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CJP Protest: ‘शिक्षा ने मेरी जिंदगी बदली, अब छात्रों की लड़ाई लड़ूंगा’, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे छात्र मोहम्मद जुनैद

By Sanjana Das

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CJP Protest: 'शिक्षा ने मेरी जिंदगी बदली, अब छात्रों की लड़ाई लड़ूंगा', सुप्रीम कोर्ट पहुंचे छात्र मोहम्मद जुनैद
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सोशल संवाद / डेस्क : राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले चर्चित CJP छात्र आंदोलन के दौरान सक्रिय रहे 24 वर्षीय कानून के छात्र मोहम्मद जुनैद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि आंदोलन में उनकी भूमिका की वजह से उन्हें पुलिस ने गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया और पूरी रात पूछताछ के बाद अगले दिन छोड़ दिया। उनकी याचिका पर अभी सुनवाई होना बाकी है।

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जुनैद का कहना है कि वह किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के साथ आंदोलन में नहीं जुड़े थे, बल्कि शिक्षा के प्रति अपने परिवार की सोच ने उन्हें छात्रों के अधिकारों के लिए खड़ा होने की प्रेरणा दी।

‘शिक्षा ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी थी’

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के पास एक छोटे से गांव से आने वाले मोहम्मद जुनैद का परिवार खेती करता है। उनके माता-पिता कभी स्कूल नहीं जा सके, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने बच्चों की पढ़ाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया।जुनैद बताते हैं कि उनके माता-पिता अक्सर कहते थे कि “शिक्षा ही वह संपत्ति है, जो कोई छीन नहीं सकता।” यही सोच उन्हें कानून की पढ़ाई तक लेकर आई और बाद में छात्र आंदोलन से भी जोड़ गई।

एक दिन के लिए पहुंचे थे, छह हफ्ते तक डटे रहे

जुनैद बताते हैं कि जब CJP ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया, तो वह सिर्फ एक दिन के लिए वहां पहुंचे थे। लेकिन आंदोलन बढ़ता गया और वह करीब छह सप्ताह तक प्रदर्शन स्थल पर ही रहे।इस दौरान वह आंदोलन के प्रमुख चेहरों में नहीं थे, लेकिन पर्दे के पीछे रहकर प्रदर्शन की व्यवस्थाओं को संभालने वाले प्रमुख स्वयंसेवकों में शामिल हो गए।

खाने, पानी और रहने की व्यवस्था संभाली

प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में बड़ी संख्या में छात्र जंतर-मंतर पर रुके थे, लेकिन वहां न पर्याप्त पानी था और न ही रहने की व्यवस्था।

जुनैद ने अपने पुराने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए लोगों से मदद जुटानी शुरू की। उन्होंने पीने का पानी, भोजन, दवाइयों, कंबल और ठहरने की व्यवस्था कराने में अहम भूमिका निभाई।

समय के साथ किसानों, गुरुद्वारों और कई सामाजिक संगठनों ने भी आंदोलन को सहयोग देना शुरू किया। जुनैद के मुताबिक, बाद में लोग राहत सामग्री सीधे उनके पास पहुंचाने लगे।

‘हर कहानी ने मुझे झकझोर दिया’

जुनैद कहते हैं कि आंदोलन के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से आए छात्रों और अभिभावकों की कहानियों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।उन्होंने बताया कि कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लेकर कोचिंग करा रहे थे। एक दंपति अपनी बेटी की याद में प्रदर्शन स्थल पर भोजन बांटने पहुंचे। उनके अनुसार, बेटी ने कथित परीक्षा अनियमितताओं के बाद आत्महत्या कर ली थी।जुनैद का कहना है कि ऐसी घटनाओं ने उन्हें महसूस कराया कि शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की उम्मीद है।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

जुनैद का आरोप है कि आंदोलन खत्म होने से एक दिन पहले उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया, पूरी रात पूछताछ की और अगले दिन रिहा कर दिया।उनकी याचिका में इस कार्रवाई को अवैध बताया गया है। हालांकि, इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।इधर, आंदोलन से जुड़े अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी विभिन्न राज्यों में पुलिस कार्रवाई और हिरासत को लेकर सवाल उठाए हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है।

‘अब शिक्षा के अधिकार की लड़ाई जारी रखूंगा’

जुनैद का कहना है कि इस आंदोलन ने उनकी सोच बदल दी है। अब वह सिर्फ कानून की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि शिक्षा और छात्रों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाना चाहते हैं।उनके शब्दों में, “शिक्षा ने मेरी जिंदगी बदली है। अब मैं चाहता हूं कि हर छात्र को न्याय मिले और उसकी आवाज सुनी जाए।”

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