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मुख्यमंत्री सचिवालय से ACB तक पहुंची शिक्षा विभाग की शिकायत, बहु-प्रखंडीय प्रभार मामले में जांच की मांग

By Riya Kumari

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मुख्यमंत्री सचिवालय से ACB तक पहुंची शिक्षा विभाग की शिकायत, बहु-प्रखंडीय प्रभार मामले में जांच की मांग
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सोशल संवाद / डेस्क : चक्रधरपुर: शिक्षा विभाग से जुड़े कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के एक मामले ने अब राज्य स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। चक्रधरपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं सूचना अधिकार (RTI) कार्यकर्ता बैरम खान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर मुख्यमंत्री सचिवालय और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने संज्ञान लिया है। शिकायत में एक ऐसे पदाधिकारी के कार्यकाल से जुड़े मामलों की जांच की मांग की गई है, जिन्होंने विभिन्न प्रखंडों और शैक्षणिक संस्थानों का प्रभार संभाला था।

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मुख्यमंत्री सचिवालय ने शिक्षा विभाग को भेजा मामला

बैरम खान के अनुसार, उनकी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय ने पत्रांक संख्या 2702410 दिनांक 23 अप्रैल 2026 के माध्यम से मामले को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड, रांची को आवश्यक कार्रवाई के लिए अग्रसारित किया है। साथ ही विभाग को मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी सचिवालय को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है।

ACB ने दर्ज किया परिवाद

मामले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), झारखंड ने भी संज्ञान में लिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ACB ने परिवाद संख्या 246/2026, दिनांक 09 मई 2026 दर्ज कर प्रारंभिक स्तर पर अग्रेतर कार्रवाई शुरू कर दी है। ब्यूरो की ओर से स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को भी आवश्यक कार्रवाई और संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा गया है।

शिकायत में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

शिकायतकर्ता के मुताबिक, आवेदन में शिक्षा विभाग के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • विद्यालयों में सामग्री वितरण की प्रक्रिया
  • PFMS (Public Financial Management System) के माध्यम से किए गए भुगतान
  • वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे
  • वेंडर चयन प्रक्रिया
  • प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा
  • विभिन्न प्रखंडों में प्रभार संचालन से संबंधित मामले

इसके अलावा, शिकायत में संबंधित वित्तीय मामलों का विशेष ऑडिट कराने और स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है।

निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग

बैरम खान का कहना है कि संबंधित पदाधिकारी ने अलग-अलग प्रखंडों और संस्थानों में जिम्मेदारियां निभाई हैं, इसलिए मामला व्यापक प्रशासनिक दायरे से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सभी अभिलेखों, वित्तीय दस्तावेजों और प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि तथ्यों की वस्तुनिष्ठ समीक्षा हो सके।

जनहित और जवाबदेही पर जोर

शिकायतकर्ता ने राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और जांच एजेंसियों से अनुरोध किया है कि मामले की जांच पारदर्शी तरीके से की जाए। साथ ही शिकायतकर्ताओं और सूचनादाताओं की पहचान गोपनीय रखने तथा जनहित से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक धन के उचित उपयोग को सुनिश्चित करना है।

जांच के परिणाम पर टिकी निगाहें

मुख्यमंत्री सचिवालय और ACB द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद अब यह मामला चर्चा में है। आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सभी की नजरें रहेंगी। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों और तथ्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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