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कांग्रेस का आरोप- चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहा

सोशल संवाद/दिल्ली (रिपोर्ट – सिद्धार्थ प्रकाश ) : कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहा है। कांग्रेस कार्य समिति सदस्य और पार्टी प्रवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, शिकायत के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ चुनाव आयोग द्वारा कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने वोटिंग डाटा रिलीज में देरी को लेकर भी सवाल उठाए। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, चुनाव आयोग द्वारा कहा गया कि सभी को हिदायत है कि साम्प्रदायिक न हों। हमारी शिकायत के बावजूद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का चुनाव आयोग के किसी दस्तावेज में नाम नहीं लिया गया।

आयोग ने किसी को भी चेतावनी नहीं दी और न ही कोई प्रतिबंध लगाया और न ही कोई दोषारोपण किया गया। चुनाव आयोग ने दोनों पार्टियों के अध्यक्षों को लिखा कि आप अपने स्टार प्रचारकों को कहें कि वे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन न करें। ये सभी चीजें उच्च स्तरीय संवैधानिक संस्था को शोभा नहीं देती हैं। ये संस्था के संवैधानिक उत्तरदायित्वों के खिलाफ है। ये चुनाव आयोग है, किसी पार्टी का चुनाव एजेंट नहीं है। कांग्रेस नेता ने कहा, हम अचंभित हैं कि इस प्रकार की चीज़ें हो रही हैं। जब कोई संवैधानिक संस्था संविधान का पालन नहीं करती और वो सत्ता की ओर झुकाव दिखाती है तो समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र का अंत है।

सिंघवी ने कहा, चुनाव आयोग ने हिदायत दी है कि संविधान के खतरे में होने को लेकर कोई टिप्पणी न करें। जो चीजें संविधान पर सवाल उठाती हैं, आप नहीं कह सकते। हम खुलेआम कह रहे हैं कि जब तक आचार संहिता का उल्लंघन न हो, कौन क्या बोलेगा, ये तय करने का अधिकार चुनाव आयोग को नहीं है। आज भारत की अस्मिता, भारत की सोच, भारत के संविधान का मूल ढांचा खतरे में है।

सिंघवी ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के सामने फॉर्म 17 सी डेटा का खुलासा करने की मांग बड़ी सरल है। 17 सी जो फॉर्म है, जिसमें दर्ज होता है कि एक पोलिंग स्टेशन में कितने वोट दिए गए; कौन सी मशीन, किस सीरियल नंबर वाली कौन से पोलिंग स्टेशन में लगाई है; हर मशीन पर कितने वोट पड़े, ये सभी बातें चुनाव आयोग अपनी वेबसाइट पर डाल दे लेकिन चुनाव आयोग ने इस मांग के जवाब में जो कहा है, वह अजीबोगरीब है और एक तरह से कुतर्क है। चुनाव आयोग का कहना है कि डेटा के साथ छेड़छाड़ होगी, कोई फोटो मॉर्फ कर सकता है। ऐसे तो फिर कोई भी डेटा अपलोड नहीं हो सकता। चुनाव आयोग का ये जवाब सिर्फ बचने की प्रक्रिया है। जबकि यही डेटा कोई भी चुनाव आयोग को पैसे चुकाकर ले सकता है। इसीलिए ये दुर्भाग्यपूर्ण है और दिखाता है कि चुनाव आयोग का झुकाव एकतरफा है।

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