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क्या बदल सकते हैं SIM Binding के नियम? सरकार दे सकती है कुछ ऐप्स को राहत

By Riya Kumari

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क्या बदल सकते हैं SIM Binding के नियम? सरकार दे सकती है कुछ ऐप्स को राहत

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सोशल संवाद / डेस्क : केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित SIM Binding नियम को लेकर अब नई चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार इन नियमों में कुछ बदलाव या नरमी पर विचार कर सकती है, जिससे कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप्स को राहत मिल सकती है।

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क्या है SIM Binding नियम?

दिसंबर 2025 में Department of Telecommunications (DoT) ने नए साइबर सुरक्षा नियम जारी किए थे। इन नियमों के तहत मैसेजिंग ऐप्स को यूजर के मोबाइल SIM कार्ड से लगातार लिंक रहना जरूरी होगा। इसका मतलब यह है कि जिस SIM से अकाउंट बनाया गया है, उसी SIM वाले डिवाइस से ऐप का इस्तेमाल करना होगा।

इसके अलावा अगर कोई यूजर इन ऐप्स को वेब या डेस्कटॉप वर्जन पर इस्तेमाल करता है, तो सिस्टम उसे हर कुछ घंटों में लॉगआउट भी कर सकता है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सुरक्षा बढ़ाना और डिजिटल धोखाधड़ी को रोकना है।

टेक कंपनियों ने जताई चिंता

इन नियमों को लेकर कई टेक कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह नियम केवल उन ऐप्स पर लागू होना चाहिए जो मुख्य रूप से मैसेजिंग प्लेटफॉर्म हैं।

कई बड़े ऐप्स में मैसेजिंग केवल एक फीचर होता है, जबकि उनकी मुख्य सेवा कुछ और होती है। ऐसे में उन पर भी समान नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा।

कुछ ऐप्स को मिल सकती है छूट

सूत्रों के अनुसार सरकार अब इस बात पर विचार कर रही है कि जिन प्लेटफॉर्म्स का मुख्य काम मैसेजिंग नहीं है, उन्हें इन नियमों से आंशिक छूट दी जा सकती है। हालांकि इस मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

कुछ कंपनियों ने शुरू की तैयारी

संभावित नियमों को देखते हुए कुछ मैसेजिंग ऐप्स पहले ही तकनीकी बदलाव की तैयारी कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर WhatsApp, JioChat और Arattai जैसे प्लेटफॉर्म अपने सिस्टम को SIM से जोड़ने की व्यवस्था पर काम कर रहे हैं।

क्यों लाया गया था यह नियम?

सरकार ने यह प्रस्ताव Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules 2025 के तहत रखा था। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर फ्रॉड और टेलीकॉम से जुड़े डिजिटल अपराधों को रोकना है, खासकर उन मामलों में जहां अपराधी विदेश से फर्जी नंबरों का इस्तेमाल करते हैं।

SIM Binding नियम का उद्देश्य साइबर सुरक्षा मजबूत करना है, लेकिन टेक कंपनियों की चिंताओं को देखते हुए सरकार इसमें कुछ बदलाव कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो कई ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को बड़ी राहत मिल सकती है।

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