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प्रवेश वर्मा के जल बोर्ड का अध्यक्ष बनने के बाद से छिपाई जा रही टेंडरों की जरूरी जानकारी: सौरभ भारद्वाज

By Riya Kumari

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प्रवेश वर्मा के जल बोर्ड का अध्यक्ष बनने के बाद से छिपाई जा रही टेंडरों की जरूरी जानकारी: सौरभ भारद्वाज
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सोशल संवाद / नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एलजी और मुख्यमंत्री का ध्यान दिल्ली जल बोर्ड के मिनट्स ऑफ़ मीटिंग में की जा रही गड़बड़ी की ओर खींचा है। उन्होंने एलजी और सीएम से कहा कि जब से प्रवेश वर्मा दिल्ली जल बोर्ड का अध्यक्ष बने हैं, टेंडरों की जरूरी जानकारी बोर्ड में मिनट्स में छिपाई जा रही है।

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इससे पहले जल बोर्ड के मिनट्स में ठेकेदार के नाम और एल-1 कीमत स्पष्ट रूप से बताई जाती थी, लेकिन अब नहीं बताई जा रही। टेंडर की कीमतों और टेंडर लेने वाली कंपनी के नाम छिपाना परंपरा के खिलाफ है। जब सारी जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी, तो कैसे पता चलेगा कि दिल्लीवालों का पैसा कहां इस्तेमाल हो रहा है?

बुधवार को “आप” के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और एलजी साहब को इस ओर ध्यान देना चाहिए कि जब से प्रवेश वर्मा दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष बने हैं, तब से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बोर्ड बैठक के मिनट्स बहुत ही चालाकी से तैयार किए जा रहे हैं। अब करोड़ों रुपए के टेंडर और अनुबंधों के महत्वपूर्ण विवरण प्रकाशित नहीं किए जाते हैं।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पहले जल बोर्ड के मिनट्स में ठेकेदार का नाम और सटीक एल-1 कीमत स्पष्ट रूप से बताई जाती थी, जिससे टैक्सपेयर और पत्रकारों को जनता के पैसे की निगरानी करने में मदद मिलती थी। अगस्त 2025 के बाद से इन विवरणों को पूरी तरह से हटा दिया गया है। अब मिनट्स केवल एक सामान्य चेकलिस्ट की तरह दिखते हैं, जिसमें सिर्फ सामान्य बजट अनुमान या आंतरिक विभाग के कोड (जैसे श्प्रस्तावश् संख्या) ही दिखाई देते हैं।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह दिल्ली जल बोर्ड के स्थापित तरीके का सीधा उल्लंघन है। अंतिम कीमतों और टेंडर जीतने वाली कंपनियों के नामों को छिपाने से जनता यह नहीं जान पाती कि सार्वजनिक धन का सही इस्तेमाल हो रहा है या फिर अंदरूनी चहेते लोगों को ठेके बांटे जा रहे हैं। 650 करोड़ रुपए के स्वास्थ्य घोटाले में भी एसीबी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि महत्वपूर्ण फाइलें नष्ट कर दी गई थीं। जल बोर्ड के मिनट्स में इस तरह विवरण छिपाना एक संभावित खतरा है और इसी तरीके का इस्तेमाल करके दिल्ली जल बोर्ड की फाइलें भी नष्ट की जा सकती हैं।

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