सोशल संवाद / रांची: झारखंड में चक्रवाती तूफान अर्णब के प्रभाव से हुई बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे कराने और किसानों को नियमानुसार मुआवजा देने की तैयारी शुरू कर दी है।
यह भी पढे : Indian Railways: विशेष अभियान 6 के तहत रेलवे ने हासिल किए कई लक्ष्य, 31 अक्टूबर को होगा समापन
स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों (डीसी) को पत्र लिखकर तत्काल व्यापक स्थलीय सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया है। प्रशासनिक टीमों को गांव-गांव जाकर खेतों का निरीक्षण करने और फसल को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन करने को कहा गया है।
प्रभावित किसानों की सूची होगी तैयार
मंत्री ने निर्देश दिया है कि सर्वे के दौरान धान की फसल और कृषि भूमि को हुए नुकसान का निष्पक्ष एवं पारदर्शी आकलन किया जाए। प्रभावित किसानों की सूची तैयार कर उन्हें सरकार के निर्धारित प्रावधानों के तहत राहत और क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि किसान पूरे साल मेहनत करके फसल तैयार करते हैं। प्राकृतिक आपदा के कारण फसल बर्बाद होने से उनकी आजीविका और आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए सर्वे में किसी तरह की लापरवाही या खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अस्पतालों को भी अलर्ट रहने का निर्देश
चक्रवात और लगातार बारिश की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। मंत्री ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
प्रत्येक सदर अस्पताल में कम से कम 10 अतिरिक्त बेड, जरूरी दवाइयां, जीवनरक्षक औषधियां, ऑक्सीजन, एंबुलेंस और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रखने को कहा गया है। इसके अलावा वज्रपात, सर्पदंश और बारिश से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त तैनाती के निर्देश दिए गए हैं।
निचले इलाकों में विशेष निगरानी
प्रशासन को जलजमाव वाले क्षेत्रों, निचले इलाकों और नदी-नालों के आसपास विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्यों के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
सरकार का कहना है कि फसल नुकसान का आकलन सही तरीके से किया जाएगा, ताकि प्रभावित और पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता मिल सके।
नोट: मुआवजे की राशि और भुगतान की तारीख से संबंधित कोई निश्चित घोषणा उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है। सहायता निर्धारित सरकारी नियमों और सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर दी जाएगी।










