सोशल संवाद/जमशेदपुरः परसुडीह क्षेत्र स्थित गदड़ा में मंगलवार को आदिवासियों के ऐतिहासिक और पारंपरिक पर्व ‘सेंदरा’ को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी दलमा बुरू सेंदरा (शिकार पर्व) की तिथि निर्धारित करना और इसके सफल संचालन के लिए एक समिति का गठन करना था। आदिवासी समाज के लिए सेंदरा महज एक पर्व नहीं, बल्कि उनकी सदियों पुरानी स्वशासन व्यवस्था और वीरता का प्रतीक है.

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बैठक के दौरान दलमा राजा ने बताया कि सेंदरा की तिथि तय करने के लिए समाज के विभिन्न प्रमुखों जैसे परगना, माझी बाबा, मानकी-मुंडा और दिसुआ सेंदरा वीरों के साथ गहन विचार-विमर्श किया गया है। हालांकि, तिथि का चयन हो चुका है, लेकिन इसे तुरंत सार्वजनिक नहीं किया गया। आदिवासी परंपरा के अनुसार, 3 अप्रैल को गदड़ा में सेंदरा पूजा आयोजित की जाएगी। इसी दिन ‘गिरा सकाम’ (खजूर के पत्तों से बना निमंत्रण पत्र) तैयार कर सेंदरा वीरों को भेजा जाएगा। इस पूजा के बाद ही सेंदरा की तिथि को औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। यह परंपरा दर्शाती है कि आदिवासी समाज आज भी अपनी जड़ों और विधिवत नियमों से कितना गहराई से जुड़ा हुआ है।
दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने इस बात पर जोर दिया कि सेंदरा की परंपरा पर आधुनिकता और कानूनी बंदिशों का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने घोषणा की कि समिति का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही रांची जाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात करेगा। इस मुलाकात का उद्देश्य सेंदरा की पौराणिक परंपरा के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए सरकार से सहयोग मांगना है। आदिवासी समाज चाहता है कि उनकी इस सांस्कृतिक विरासत को प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाए और इसे सम्मान के साथ मनाया जाए।









