सोशल संवाद / डेस्क : Delhi की पुरानी आबकारी नीति को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। Comptroller and Auditor General of India (CAG) की रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री Manjinder Singh Sirsa ने गंभीर आरोप लगाए और इसे “सुनियोजित नीति” बताया।

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CAG रिपोर्ट में अनियमितताओं का दावा
दिल्ली विधानसभा में चर्चा के दौरान सिरसा ने कहा कि CAG और पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) की टिप्पणियों से साफ है कि कई विभागों में गड़बड़ियां हुईं, लेकिन आबकारी नीति सबसे बड़ा मामला बनकर सामने आया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोई प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर बनाई गई नीति थी, जिससे कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाया गया।
₹2000 करोड़ से ज्यादा नुकसान का आरोप
मंत्री के अनुसार, CAG रिपोर्ट में बताया गया है कि
- 17 नवंबर 2021 से 31 अगस्त 2022 के बीच
- दिल्ली सरकार को ₹2000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ
उन्होंने कहा कि ज्यादा बिक्री के बावजूद सरकार को नुकसान होना कई सवाल खड़े करता है।
बाजार में एकाधिकार बनाने का आरोप
नीति में किए गए बदलावों को लेकर भी सिरसा ने सवाल उठाए:
- 77 होलसेलर्स की संख्या घटाकर 13 कर दी गई
- इनमें से 3 कंपनियों ने करीब 77.7% बाजार पर कब्जा कर लिया
उनके मुताबिक, इससे खुला बाजार खत्म होकर कार्टेल जैसी स्थिति बन गई।
लाइसेंस प्रक्रिया पर उठे सवाल
मंत्री ने आरोप लगाया कि:
- कम आय या घाटे में चल रही कंपनियों को लाइसेंस दिए गए
- कई कंपनियों की नेट वर्थ नेगेटिव होने के बावजूद उन्हें बड़े जोन आवंटित किए गए
यह सभी फैसले नियमों के खिलाफ बताए गए।
कोविड के दौरान फीस माफी पर विवाद
सिरसा ने कोविड काल में लिए गए फैसलों की भी आलोचना की:
- ₹144 करोड़ की लाइसेंस फीस माफ की गई
- नॉन-कन्फॉर्मिंग क्षेत्रों में दुकानें न खुलने पर ₹900 करोड़ से ज्यादा की राहत दी गई
उन्होंने इसे “जनता के पैसे का दुरुपयोग” बताया।
बिना मंजूरी फैसले लेने का आरोप
मंत्री ने कहा कि कई महत्वपूर्ण निर्णय बिना सक्षम प्राधिकारी और उपराज्यपाल को जानकारी दिए बिना लिए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
Arvind Kejriwal पर निशाना
सिरसा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा:
“कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। दिल्ली की जनता को सच और न्याय मिलना चाहिए।”
साथ ही उन्होंने पंजाब में भी इसी तरह के कथित घोटाले की आशंका जताई।
दिल्ली की आबकारी नीति को लेकर CAG रिपोर्ट के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। अब इस मामले में जांच और जवाबदेही पर सबकी नजरें टिकी हैं।









