सोशल संवाद/डेस्क: झारखंड में डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 13 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया है। चिकित्सक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार ने मांगों पर ठोस पहल नहीं की, तो 21 अक्टूबर को सांकेतिक हड़ताल की जाएगी और 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू किया जा सकता है।
आंदोलन में झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (झासा), इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) झारखंड और अन्य चिकित्सा संगठनों के शामिल होने की जानकारी है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी मुद्दों का समाधान किया जाना जरूरी है।
13 से 22 अक्टूबर तक डॉक्टरों के आंदोलन का कार्यक्रम
डॉक्टर संगठनों की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन अलग-अलग चरणों में चलाया जाएगा।
- 13 से 20 अक्टूबर: डॉक्टर काली पट्टी बांधकर मरीजों का इलाज करते हुए विरोध दर्ज कराएंगे।
- 21 अक्टूबर: राज्यव्यापी प्रदर्शन और सांकेतिक हड़ताल का कार्यक्रम है।
- 22 अक्टूबर से: मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।
आंदोलन के दौरान अस्पतालों में सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह संबंधित संगठनों और स्वास्थ्य विभाग के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा। मरीजों को अस्पताल जाने से पहले संबंधित संस्थान से सेवा की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी जाती है।
डॉक्टरों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
चिकित्सक संगठनों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- डॉक्टरों के लिए डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) लागू करना।
- सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति।
- डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट।
- संविदा चिकित्सकों की नियुक्ति नियमावली में सुधार।
- सेवा शर्तों, पदोन्नति और सेवानिवृत्ति से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान।
- स्वास्थ्य संस्थानों से संबंधित नियमों में आवश्यक बदलाव।
डायनेमिक ACP लागू करने की मांग
डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) शामिल है। इसके तहत चिकित्सकों को निर्धारित सेवा अवधि के आधार पर करियर में वित्तीय उन्नति का लाभ देने की व्यवस्था की मांग की जा रही है।
झासा का कहना है कि झारखंड में डॉक्टरों के करियर प्रोग्रेशन और सेवा लाभ से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया जाना चाहिए। संगठन ने केंद्र और बिहार में लागू व्यवस्थाओं के अनुरूप राज्य में भी उचित व्यवस्था बनाने की मांग उठाई है।
रिक्त पदों पर नियमित बहाली की मांग
डॉक्टरों ने सरकारी अस्पतालों में खाली पदों को भरने के लिए नियमित नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने की मांग की है। चिकित्सक संगठनों के अनुसार, रिक्त पदों के कारण मौजूदा डॉक्टरों पर काम का दबाव बढ़ता है। नियमित बहाली से अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग
आंदोलन में डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा भी शामिल है। चिकित्सक संगठनों ने अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने तथा डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है। इसके साथ ही मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विवादों के समाधान के लिए उचित व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है।
सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
डॉक्टर संगठनों ने साफ किया है कि उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होने की स्थिति में आंदोलन आगे बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में 21 अक्टूबर की सांकेतिक हड़ताल और 22 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर सभी की नजरें रहेंगी।
मरीजों के लिए जरूरी है कि वे अस्पतालों से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें, खासकर यदि उन्हें नियमित जांच, इलाज या किसी नियोजित प्रक्रिया के लिए अस्पताल जाना है।











