सोशल संवाद / डेस्क : सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने लंबी भूख हड़ताल के बाद अस्पताल में भर्ती किए जाने के बावजूद इलाज लेने से इनकार कर दिया है। डॉक्टरों ने उनकी बिगड़ती शारीरिक स्थिति को देखते हुए उन्हें और उनके परिवार से तत्काल चिकित्सा उपचार स्वीकार करने की अपील की है।
डॉक्टरों ने जताई गंभीर चिंता
मेडिकल टीम के अनुसार, सोनम वांगचुक को लंबे समय तक उपवास रहने के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी के संकेत मिले हैं। डॉक्टरों ने उन्हें इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन और आवश्यक दवाएं देने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने फिलहाल इनकार कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इलाज में देरी से किडनी और अन्य अंगों पर असर पड़ सकता है।
अस्पताल ने जारी किया स्वास्थ्य अपडेट
सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में बताया गया कि फिलहाल सोनम वांगचुक की स्थिति स्थिर है, लेकिन लगातार निगरानी और चिकित्सकीय देखरेख की जरूरत है। अस्पताल का कहना है कि लंबे उपवास के कारण शरीर पर प्रभाव पड़ा है और समय पर इलाज बेहद जरूरी है।
अस्पताल में भर्ती किए जाने पर विवाद
सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस का कहना है कि यह कदम चिकित्सकीय सलाह और अदालत के निर्देशों के आधार पर उठाया गया, जबकि वांगचुक और उनके समर्थकों ने इसे अपनी इच्छा के विरुद्ध कार्रवाई बताया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।









