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Seraikela राजपरिवार की 16 दिवसीय दुर्गा पूजा परंपरा: जिउतियाष्टमी से महाष्टमी तक उत्सव

By Aditi Pandey

Published :

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सोशल संवाद/डेस्क: झारखंड के Seraikela जिले में दुर्गा पूजा का आयोजन सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है। राजवाड़ी की यह पूजा 16 दिनों तक चलती है। इसकी शुरुआत जिउतियाष्टमी की रात होती है और समापन महाष्टमी तक होता है।

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राजमहल परिसर के पाउड़ी मंदिर में अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित रहती है। षष्टी के दिन राजपरिवार खरकई नदी तट पर शस्त्र पूजा करता है, जिसके बाद मां दुर्गा का आह्वान कर पूजा राजमहल के सामने स्थित दुर्गा मंदिर में की जाती है।नवमी के दिन नुआखाई का विशेष आयोजन होता है। इस मौके पर नई फसल से बना चावल देवी को अर्पित किया जाता है और प्रसाद स्वरूप राजपरिवार ग्रहण करता है।

इस दिन मां पाउड़ी मंदिर में प्रवेश के लिए सख्त परंपराएं हैं महिलाएं केवल साड़ी और पुरुष केवल धोती-गमछा पहनकर ही मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं।1620 में राजा विक्रम सिंह द्वारा रियासत की स्थापना के साथ ही यह पूजा शुरू हुई थी। आज भी सिंह वंश की 64वीं पीढ़ी, राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव, इस परंपरा को उसी श्रद्धा और निष्ठा के साथ निभा रहे हैं।

यह पूजा न सिर्फ आस्था का प्रतीक है बल्कि सरायकेला के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक पहचान का भी जीवंत प्रमाण है।

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