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लिवर कैंसर के शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज करना पड़ सकता है खतरनाक

By Riya Kumari

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लिवर कैंसर के शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज करना पड़ सकता है खतरनाक

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सोशल संवाद / डेस्क : आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तला भुना, जंक और प्रोसेस्ड फूड हमारी डाइट का बड़ा हिस्सा बन चुका है। इसके साथ ही फिजिकल एक्टिविटी की कमी ने लिवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा और बढ़ा दिया है। अनहेल्दी लाइफस्टाइल, गलत खान पान, शराब का ज्यादा सेवन और हेपेटाइटिस जैसे संक्रमणों की वजह से लिवर कैंसर (Liver Cancer) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

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सबसे चिंताजनक बात यह है कि लिवर कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर इतने हल्के होते हैं कि लोग उन्हें गैस, कमजोरी या सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक वह गंभीर स्टेज में पहुंच चुकी होती है। इसलिए जरूरी है कि इसके शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचाना जाए।

लिवर कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

Mayo Clinic के अनुसार, लिवर कैंसर के कुछ ऐसे शुरुआती लक्षण हैं जिन्हें पहचानना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं इसके प्रमुख संकेत

पेट के दाहिने हिस्से में दर्द या सूजन

अगर पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में, खासकर पसलियों के नीचे, लगातार दर्द, खिंचाव, दबाव या सूजन महसूस हो रही है तो इसे हल्के में न लें। कई लोग इसे गैस या एसिडिटी समझ लेते हैं, लेकिन यह लिवर के बढ़ने या ट्यूमर के दबाव की वजह से भी हो सकता है। कुछ मामलों में पेट में पानी भरने से भारीपन और फूला हुआ एहसास भी होता है।

बिना वजह वजन घटना और भूख कम लगना

अगर आप बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के तेजी से वजन खो रहे हैं और खाने की इच्छा भी कम हो गई है, तो यह लिवर कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। कैंसर लिवर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है, जिससे पाचन ठीक से नहीं हो पाता। नतीजतन शरीर जरूरी पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाता और वजन घटने लगता है।

पीलिया (Jaundice)

पीलिया लिवर कैंसर का एक अहम लक्षण माना जाता है। इसमें त्वचा, आंखों का सफेद हिस्सा और नाखून पीले पड़ने लगते हैं। यह तब होता है जब लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता और खून में बिलिरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। इसके साथ ही यूरिन का रंग गहरा पीला या भूरा और मल का रंग हल्का होना भी चेतावनी संकेत हैं।

लगातार थकान और कमजोरी

अगर आपको रोजमर्रा के हल्के कामों के बाद भी अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होती है और आराम करने के बाद भी सुधार नहीं होता, तो इसे गंभीरता से लें। लिवर कैंसर शरीर की ऊर्जा उत्पादन क्षमता को प्रभावित करता है। इसके अलावा एनीमिया भी इसका कारण हो सकता है, क्योंकि लिवर रेड ब्लड सेल्स से जुड़ी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है।

क्यों जरूरी है समय पर जांच?

लिवर कैंसर की पहचान जितनी जल्दी हो जाए, इलाज की संभावना उतनी ही बेहतर होती है। अगर ऊपर बताए गए लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और जरूरी जांच कराएं।

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