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भागवत कथा के पांचवें दिन कृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन, मथुरा से नंदगांव तक कथा प्रवाह

By Aditi Pandey

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fifth day of the Bhagwat Katha भागवत

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सोशल संवाद/डेस्क: भागवत कथा के पांचवें दिन आचार्य नीरज मिश्रा ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान बताया गया कि किस प्रकार वसुदेव बालक रूप में जन्मे कृष्ण को डाले में रखकर यमुना नदी पार कराते हैं। यह डाला आगे चलकर मथुरा के राजा उग्रसेन को प्राप्त होता है। कंस की उदंडता और अत्याचारों से त्रस्त मथुरा की प्रजा का करुण विलाप भी कथा में सामने आया।

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आचार्य ने बताया कि कंस का कठोर होने का दिखावा झूठा था, क्योंकि बहन की विदाई के समय उसके आंसू इस बात को झुठलाते हैं। उन्होंने कहा कि इस पृथ्वी का अटल सत्य मृत्यु है और मृत्यु को पार करने वाले केवल महामृत्युंजय हैं। जीवन में मूल्यवान विषयों को अपनाने और माया से दूर रहने का संदेश भी दिया गया। उन्होंने कहा कि माया बंधन और कष्ट देती है।

कथा में बताया गया कि पहले पुत्र का नाम कीर्तिमान था, जबकि बलराम का एक नाम संकर्षण भी है। नंदगांव में जैसे ही नंद बाबा को पुत्र प्राप्ति का समाचार मिला, पूरे गांव में उत्सव और आनंद का माहौल छा गया।

कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अमरप्रीत सिंह काले, जिला परिषद उपाध्यक्ष पंकज सिन्हा, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष राजकुमार सिंह, इस्पात मेल के संपादक बृजभूषण सिंह, जंबू अखाड़ा के संरक्षक बंटी सिंह, हिंदू जागरण मंच अध्यक्ष बलबीर मंडल, अमित झा, रणवीर मंडल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में भोग अर्पित किया गया और प्रसाद का वितरण किया गया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में शत्रुघ्न प्रसाद, संजय गुप्ता, रूपा गुप्ता, स्वाति गुप्ता, अमर भूषण, देवाशीष झा सहित अन्य सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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