सोशल संवाद/डेस्क: साल 2026 भारत के सुप्रीम कोर्ट के लिए काफी अहम होने वाला है। इस वर्ष शीर्ष अदालत के पांच वरिष्ठ न्यायाधीश अपनी सेवा अवधि पूरी कर सेवानिवृत्त होंगे। इससे सुप्रीम कोर्ट में रिक्तियों की संख्या बढ़ जाएगी, जिन्हें भरना न्यायपालिका की दक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक होगा।

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दिसंबर 2025 तक सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 है। आगामी अप्रैल से नवंबर तक पांच जज क्रमशः सेवानिवृत्त होंगे:
- जस्टिस राजेश बिंदल – 15 अप्रैल 2026 (पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट)
- जस्टिस पंकज मिथल – 16 जून 2026 (इलाहाबाद हाईकोर्ट)
- जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी – 28 जून 2026 (मध्य प्रदेश हाईकोर्ट)
- जस्टिस संजय करोल – 22 अगस्त 2026 (हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट)
- जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा – 29 नवंबर 2026 (मध्य प्रदेश हाईकोर्ट)
इन सेवानिवृत्तियों के कारण कोर्ट की कार्य क्षमता पर असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को नए न्यायाधीशों की सिफारिशें समय पर करना होंगी और केंद्र सरकार को उन्हें मंजूरी देना होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न्याय वितरण की गति और लंबित मामलों के बोझ को संभालने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
साथ ही, नियुक्तियों में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संतुलन बनाए रखना भी कॉलेजियम के लिए चुनौती होगी। इलाहाबाद, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठ जजों के जाने के बाद उत्तराधिकारियों का चयन करते समय विविधता और क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखना जरूरी है।
2026 में यह तय होगा कि सुप्रीम कोर्ट की कार्य शक्ति और न्याय वितरण की गति बनी रहेगी या रिक्तियों के कारण वादकारियों के लिए न्याय मिलने में विलंब होगा।










