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भक्ति से विमर्श तक: ‘अपने अपने राम – राम कथा’ ने दिल्ली विधानसभा में छोड़ी गहरी अध्यात्मक छाप

By Riya Kumari

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भक्ति से विमर्श तक: ‘अपने अपने राम – राम कथा’ ने दिल्ली विधानसभा में छोड़ी गहरी अध्यात्मक छाप

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सोशल संवाद / नई दिल्ली :  दिल्ली विधान सभा में आज ‘अपने अपने राम – राम कथा’ का आयोजन किया गया, जिसमें प्रसिद्ध कवि एवं राम कथा वक्ता डॉ. कुमार विश्वास की प्रभावशाली प्रस्तुति ने लोगों से भरे सभागार को गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव और सभ्यता संबंधी चिंतन के वातावरण में परिवर्तित कर दिया।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली विधान सभा के माननीय अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने कहा, “राम केवल आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि आचरण के जीवंत सिद्धांत हैं। उनका जीवन हमें व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में कर्तव्य, संतुलन और न्याय को समझने की दिशा देता है,” और इसी विचार ने पूरे कार्यक्रम की दिशा निर्धारित करी।

इस अवसर पर दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद सुश्री बांसुरी स्वराज, विधायकगण,मुख्य सचिव दिल्ली सरकार, राजीव वर्मा, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। कार्यक्रम के अनुरूप दिल्ली विधान सभा परिसर को केसरिया रंग से आलोकित किया गया, जिसने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण को और सशक्त बनाया। जनप्रतिनिधियों और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की, वहीं भारी जनसमूह की सहभागिता ने इसकी व्यापक जनस्वीकृति को दर्शाया।

कार्यक्रम का केंद्रबिंदु डॉ. कुमार विश्वास की ‘अपने अपने राम – राम कथा’ रही, जो अपनी विशिष्ट प्रस्तुति शैली और समकालीन प्रासंगिकता के लिए जानी जाती है। उन्होंने कविता, कथन और चिंतन के समन्वय के माध्यम से श्री राम के विविध आयामों को जीवंत किया, केवल एक महाकाव्य के नायक के रूप में नहीं, बल्कि एक शाश्वत नैतिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक आधार के रूप में। कथा में राम को ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ के रूप में प्रस्तुत करते हुए उनके जीवन के जटिल निर्णयों और मानवीय परिस्थितियों को भी उकेरा गया।

परंपरागत कथा-वाचन से आगे बढ़ते हुए इस प्रस्तुति ने यह दर्शाया कि श्री राम का जीवन आत्म-त्याग, संयम, करुणा और न्याय के सिद्धांतों का सशक्त उदाहरण है। कथा ने श्रोताओं को यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि राम केवल पूजनीय नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक नैतिक ढांचा भी हैं, जहां धर्म के मार्ग पर चलना व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद सर्वोपरि रहता है। इस बहुस्तरीय प्रस्तुति ने राम कथा की सार्वभौमिकता को उजागर करते हुए उसे समकालीन शासन, जिम्मेदारी और नैतिक स्पष्टता से जोड़ा।

पूरे संध्या काल तक चला यह कार्यक्रम एक गहन अनुभव बन गया, जिसमें श्रोता प्रारंभ से अंत तक पूरी तरह से लीन रहे। सभागार में एक विशेष शांति का वातावरण रहा, जिसे कथा के विभिन्न प्रसंगों ने और गहराई दी। त्याग, सत्यनिष्ठा, करुणा और साहस जैसे मूल्यों की अनुभूति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी उपस्थित रही, जिससे श्रोताओं पर गहरा प्रभाव पड़ा।

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा, “ऐसे कार्यक्रम केवल परंपरा का पुनरावलोकन नहीं करते, बल्कि उसे नए सिरे से समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं। राम में हमें भक्ति के साथ-साथ जीवन के लिए एक मार्गदर्शक भी मिलता है, जो हर युग में प्रासंगिक है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की सांस्कृतिक पहल समाज के नैतिक और बौद्धिक आधार को सुदृढ़ करती हैं।

 उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संस्थानों को ऐसे मंच के रूप में भी कार्य करना चाहिए जहां परंपरा और आधुनिक विचारों के बीच सार्थक संवाद हो सके। उन्होंने आगे कहा कि विशेष रूप से सार्वजनिक जीवन में राम के आदर्श, जिम्मेदारी, संयम और न्याय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

विजेंद्र गुप्ता ने आगे कहा कि राम कथा की स्थायी लोकप्रियता का कारण यह है कि वह हर पीढ़ी को उसके अपने संदर्भ में मार्गदर्शन देती है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते समाज में ऐसे सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ना आवश्यक है, क्योंकि ये न केवल निरंतरता प्रदान करते हैं, बल्कि सार्वजनिक जीवन को मूल्यों से भी जोड़ते हैं।

यह कार्यक्रम शिक्षा विभाग, दिल्ली सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं में सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना और भारतीय साहित्यिक एवं दार्शनिक परंपराओं के प्रति रुचि विकसित करना है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने खड़े होकर सराहना व्यक्त की, जिससे यह आयोजन दिल्ली विधान सभा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक क्षण के रूप में दर्ज हो गया।

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