सोशल संवाद/डेस्क: भारत में Gold अब सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के लिए एक मजबूत “कैश सपोर्ट सिस्टम” बनकर उभर रहा है। TransUnion CIBIL की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि Gold Loan अब देश के कुल रिटेल लोन वॉल्यूम का 36 प्रतिशत और वैल्यू के हिसाब से करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो इसे सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता क्रेडिट विकल्प बना रहा है।
यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर बंधक, सुप्रीम कोर्ट नाराज कहा- हमें पता है उपद्रवी कौन
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण है सोने की लगातार ऊंची कीमतें और इसके बदले मिलने वाला आसान और तुरंत लोन। लोग अब बिना ज्यादा कागजी प्रक्रिया के, अपने सोने के बदले तुरंत पैसा प्राप्त कर रहे हैं। यही वजह है कि दिसंबर 2025 तिमाही में औसत गोल्ड लोन 1.9 लाख रुपये तक पहुंच गया है, जो इस सेक्टर की तेज ग्रोथ को दर्शाता है।
अब यह ट्रेंड केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में भी तेजी से फैल रहा है। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जहां कुल उधारकर्ताओं में से 54 प्रतिशत अब नॉन-मेट्रो क्षेत्रों से हैं। इसके साथ ही पहली बार लोन लेने वालों की संख्या भी बढ़कर 15 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब गोल्ड लोन केवल जरूरत या मजबूरी का विकल्प नहीं रह गया, बल्कि प्राइम और हाई-प्रोफाइल ग्राहक भी इसे एक स्मार्ट फाइनेंशियल टूल के रूप में अपना रहे हैं। हालांकि, इस तेजी के बीच एक बड़ा जोखिम भी सामने आ रहा है सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई, जिससे लोन देने वाली संस्थाओं की चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कीमतों में अचानक गिरावट आती है, तो लेंडर्स को अपने लोन पोर्टफोलियो की रियल टाइम मॉनिटरिंग करनी होगी। वहीं, यह भी देखा गया है कि गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहक आमतौर पर बेहद अनुशासित होते हैं और अपने सोने को बचाने के लिए समय पर भुगतान करना प्राथमिकता देते हैं।
कुल मिलाकर, गोल्ड लोन अब भारत में तेजी से एक मेनस्ट्रीम फाइनेंशियल विकल्प बनता जा रहा है, जो आने वाले समय में और भी मजबूत हो सकता है।









