सोशल संवाद / डेस्क : अगर आपके घर में कोई पुराना एंड्रॉयड स्मार्टफोन बेकार पड़ा है, तो भविष्य में वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक नई भूमिका निभा सकता है। Google समर्थित एक नई रिसर्च के तहत पुराने स्मार्टफोन्स को AI और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा बनाने पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ई-वेस्ट कम करना और कम लागत में कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाना है।

पुराने फोन बनेंगे ‘मिनी डेटा सेंटर’
Google के सहयोग से यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो के शोधकर्ता “फोन क्लस्टर कंप्यूटिंग” तकनीक पर काम कर रहे हैं। इस तकनीक में पुराने स्मार्टफोन के मदरबोर्ड को निकालकर उन्हें एक साथ जोड़कर कंप्यूटिंग क्लस्टर तैयार किया जाता है। ये क्लस्टर छोटे स्तर के डेटा प्रोसेसिंग, AI मॉडल परीक्षण और अन्य कंप्यूटिंग कार्यों में उपयोग किए जा सकते हैं।
ई-वेस्ट और कार्बन उत्सर्जन कम करने की पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि नए सर्वर और कंप्यूटर बनाने में काफी कार्बन उत्सर्जन होता है। वहीं, पुराने स्मार्टफोन को दोबारा उपयोग में लाने से हार्डवेयर निर्माण की जरूरत कम होगी और इलेक्ट्रॉनिक कचरे (E-Waste) में भी कमी आएगी। Google की रिसर्च के अनुसार, यह पहल कंप्यूटिंग क्षेत्र के कार्बन फुटप्रिंट को घटाने में मददगार साबित हो सकती है।
अरबों स्मार्टफोन बन सकते हैं संसाधन
दुनियाभर में हर साल करोड़ों स्मार्टफोन रिटायर हो जाते हैं। इनमें से कई डिवाइस पूरी तरह खराब नहीं होते, बल्कि केवल उपयोग से बाहर हो जाते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन डिवाइसों की प्रोसेसिंग क्षमता का इस्तेमाल नए तरीके से किया जा सकता है।
पहले भी बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं फोन
Google पहले भी एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स की क्षमता का उपयोग बड़े पैमाने पर कर चुका है। कंपनी ने अरबों एंड्रॉयड फोन के सेंसर का उपयोग कर वैश्विक भूकंप चेतावनी प्रणाली विकसित की थी, जो कई देशों में शुरुआती चेतावनी देने में सक्षम है।
AI युग में बढ़ रही डेटा सेंटर की मांग
AI तकनीक के तेजी से विस्तार के कारण दुनिया भर में डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग संसाधनों की मांग लगातार बढ़ रही है। Google समेत कई बड़ी टेक कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए नए समाधान तलाश रही हैं। ऐसे में पुराने स्मार्टफोन्स को कंप्यूटिंग नेटवर्क का हिस्सा बनाना भविष्य की एक महत्वपूर्ण तकनीक बन सकता है।









