सोशल संवाद / रांची : झारखंड सरकार ने सभी सरकारी सेवकों एवं पदाधिकारियों को संसद और विधानमंडल के सदस्यों के साथ सम्मानजनक एवं सौजन्यपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया है। मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में राज्य के सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों, प्रमंडलीय आयुक्तों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों, वरीय पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों तथा अनुमंडल पदाधिकारियों को पत्र जारी किया है।
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जारी निर्देश में कहा गया है कि लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था में जनप्रतिनिधि संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए सरकारी अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाते हैं तथा आम जनता की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सरकारी सेवकों का दायित्व है कि वे संवैधानिक एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान दें।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस विषय पर वर्ष 2010, 2013, 2016, 2018 व 2021 में भी समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद सरकार के संज्ञान में कई बार ऐसी शिकायतें लाई जा रही हैं कि कई स्थानों पर इन निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में वित्त, वाणिज्य कर, योजना एवं विकास तथा संसदीय कार्य विभाग के मंत्री राधाकृष्ण किशोर की ओर से भी सरकार को पत्र भेजा गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अपर मुख्य सचिव ने पूर्व में जारी सभी निर्देशों का दृढ़ता एवं अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने जताई थी आपत्ति
संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकार के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिख कर कहा था कि पूर्व में जारी सरकारी निर्देशों के बावजूद कई अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के पत्रों का उत्तर नहीं दिया जाता, फोन नहीं उठाए जाते या कॉल बैंक नहीं किया जाता। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जनप्रतिनिधियों की बात धैर्यपूर्वक सुनें, नियमों के अनुसार समय पर कार्रवाई करें, फोन उपलब्ध रखें और शिष्टाचार संबंधी सभी सरकारी आदेशों का कड़ाई से पालन करें।









