सोशल संवाद/डेस्क : बिहार में सरकारी डॉक्टर अब ‘निजी प्रैक्टिस’ नहीं कर सकेंगे। राज्य सरकार ने सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट क्लीनिक चलाने या निजी अस्पतालों में सेवा देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘सात निश्चय-3’ के तहत इस बड़े फैसले को मंजूरी दे दी गई है।
शनिवार को स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी संकल्प के बाद अब मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और आईजीआईसी के डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। सरकार ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, डीएम और मेडिकल कॉलेज अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। नियम तोड़ने वाले डॉक्टरों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसे लागू होने की तारीख और विस्तृत गाइडलाइन जल्द जारी होगा।
निजी प्रैक्टिस बंद होने से डॉक्टरों को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई सरकार ‘नॉन प्रैक्टिस अलाउंस’ (एनपीए) देकर करेगी। यह लाभ केवल उन्हीं डॉक्टरों को मिलेगा, जो लिखित में निजी प्रैक्टिस न करने का शपथ पत्र देंगे। चोरी-छिपे प्रैक्टिस करने वालों के लिए सरकार जल्द ही सख्त नियमावली जारी करेगी। इसमें स्पष्ट किया जाएगा कि उल्लंघन करने पर कितना आर्थिक दंड लगेगा।









