सोशल संवाद/डेस्क : देश में 5G नेटवर्क को और बेहतर बनाने के लिए सरकार ने मोबाइल नेटवर्क की EMF यानी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड लिमिट बढ़ाने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए नियमों के तहत 5G बेस स्टेशन की पावर डेंसिटी लिमिट मौजूदा 5 वॉट से बढ़ाकर 10 वॉट प्रति वर्ग मीटर की जाएगी।

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सरकार के इस फैसले से टेलीकॉम कंपनियों को कम टावरों के जरिए ज्यादा बड़े इलाके में नेटवर्क पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इससे 5G सिग्नल की पहुंच बढ़ने और नेटवर्क कवरेज बेहतर होने की उम्मीद है।
अगले महीने से लागू होंगे नए नियम
रिपोर्ट के अनुसार, बदले हुए EMF नियम अगले महीने से लागू हो सकते हैं। इन नियमों का मकसद बढ़ते 5G ट्रैफिक के बीच नेटवर्क की क्वालिटी और कवरेज को बेहतर करना है।
EMF लिमिट यह तय करती है कि मोबाइल नेटवर्क से जुड़े उपकरण कितनी अधिकतम रेडियो-फ्रीक्वेंसी ऊर्जा छोड़ सकते हैं। नई लिमिट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बताया जा रहा है।
टेलीकॉम कंपनियों को मिलेगा फायदा
नई लिमिट बढ़ने से एक ही टावर से ज्यादा क्षेत्र में सिग्नल पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इससे कंपनियों को हर जगह नए टावर लगाने की जरूरत कम हो सकती है और नेटवर्क विस्तार की लागत भी घट सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय से भारत के EMF नियमों को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के करीब लाने की मांग कर रही थीं।
क्या रेडिएशन से सेहत को खतरा होगा?
EMF लिमिट बढ़ाए जाने के बाद लोगों के मन में रेडिएशन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। दूरसंचार विभाग के अनुसार, निर्धारित सुरक्षित सीमाओं के भीतर मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडियो-फ्रीक्वेंसी सिग्नल से स्वास्थ्य पर नुकसान का कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है। विभाग EMF मानकों के पालन की निगरानी भी करता है।
हालांकि, मौजूदा बदलाव को लेकर अंतिम सरकारी अधिसूचना और विस्तृत नियमों का इंतजार है।









