सोशल संवाद / डेस्क : आजकल कई लोग नाइट लैंप, टीवी या कमरे की लाइट जलाकर सोने की आदत रखते हैं। कुछ लोगों को अंधेरे में नींद नहीं आती, तो कुछ लोग सुविधा के लिए हल्की रोशनी छोड़ देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत आपकी नींद की गुणवत्ता और लंबे समय में सेहत पर असर डाल सकती है।
मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर हो सकता है प्रभावित
अंधेरा होने पर शरीर मेलाटोनिन नाम का हार्मोन बनाता है, जो अच्छी और गहरी नींद के लिए जरूरी होता है। यदि कमरे में तेज या लगातार रोशनी रहती है, तो मेलाटोनिन का उत्पादन कम हो सकता है, जिससे नींद आने में देर लग सकती है और बार-बार नींद खुलने की समस्या हो सकती है।
बॉडी क्लॉक हो सकती है गड़बड़
हमारे शरीर की एक प्राकृतिक सर्कैडियन रिदम (Body Clock) होती है, जो दिन और रात के अनुसार काम करती है। रात में रोशनी के संपर्क में रहने से यह लय प्रभावित हो सकती है, जिससे सुबह थकान, सुस्ती और दिनभर ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है।
लंबे समय में बढ़ सकता है स्वास्थ्य जोखिम
कुछ शोधों में यह पाया गया है कि लगातार रोशनी में सोने से खराब नींद की वजह से हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, यह सीधे कारण-परिणाम का संबंध साबित नहीं करता, लेकिन विशेषज्ञ बेहतर स्वास्थ्य के लिए अंधेरे कमरे में सोने की सलाह देते हैं।
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
- सोते समय कमरे की मुख्य लाइट बंद रखें।
- मोबाइल, टीवी और लैपटॉप की स्क्रीन सोने से कम से कम 30–60 मिनट पहले बंद कर दें।
- यदि हल्की रोशनी जरूरी हो, तो बहुत कम तीव्रता वाला नाइट लैंप इस्तेमाल करें।
- कमरे में बाहर की रोशनी आती हो तो ब्लैकआउट पर्दे या आई मास्क का उपयोग करें।
क्या हमेशा अंधेरे में ही सोना चाहिए?
ज्यादातर स्वस्थ वयस्कों के लिए अंधेरे कमरे में सोना बेहतर माना जाता है। हालांकि, छोटे बच्चों, बुजुर्गों या कुछ विशेष परिस्थितियों में हल्की नाइट लाइट की जरूरत हो सकती है। यदि आपको लंबे समय से नींद की समस्या है, तो डॉक्टर या स्लीप विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।









