सोशल संवाद / डेस्क : उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति ने जिंदा रहते ही अपनी ही “तेरहवीं” कर डाली। इस अनोखी घटना ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है।

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क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, औरैया के एक बुजुर्ग ने जीवन के अंतिम पड़ाव में एक अनोखा निर्णय लिया। उन्होंने अपनी मृत्यु के बाद होने वाले कर्मकांड को खुद ही जीते-जी पूरा करने का फैसला किया।
इसके तहत उन्होंने विधि-विधान से अपनी तेरहवीं (श्राद्ध भोज) का आयोजन किया और करीब 2000 लोगों को आमंत्रित कर भव्य भोज कराया।
क्यों लिया ऐसा फैसला?
बताया जा रहा है कि बुजुर्ग का मानना था कि:
- मरने के बाद क्या होगा, कोई नहीं जानता
- इसलिए उन्होंने जीते-जी ही अपने कर्मकांड पूरे करने का निर्णय लिया
- साथ ही, लोगों को अपने हाथों से भोजन कराना चाहते थे
उनका कहना था कि यह उनके जीवन की एक “अंतिम इच्छा” जैसी थी, जिसे उन्होंने खुशी-खुशी पूरा किया।
इलाके में चर्चा का विषय
इस अनोखी तेरहवीं की खबर फैलते ही आसपास के गांवों और इलाके में लोगों की भारी भीड़ जुट गई। 2000 से ज्यादा लोगों ने इस भोज में हिस्सा लिया।
लोग इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं
कुछ इसे आस्था और संतोष से जोड़ रहे हैं, तो कुछ इसे हैरान करने वाला कदम बता रहे हैं।
परंपरा से हटकर पहल
भारतीय परंपरा में तेरहवीं आमतौर पर किसी व्यक्ति के निधन के बाद की जाती है, लेकिन इस बुजुर्ग ने इस परंपरा को अलग तरीके से निभाकर एक नई चर्चा छेड़ दी है।
औरैया की यह घटना समाज में अलग सोच और जीवन के प्रति नजरिए को दिखाती है। यह मामला जितना अनोखा है, उतना ही लोगों को सोचने पर भी मजबूर करता है।









