सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड में लोकायुक्त और अन्य संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्ति को लेकर मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंचा है। इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर हाल ही में सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।
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चार साल से खाली पड़े पदों पर कोर्ट की सख्ती
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि राज्य में लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग, राज्य सूचना आयोग समेत कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि इतने समय तक संवैधानिक संस्थाओं को निष्क्रिय रखना उचित नहीं है और इससे आम जनता के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
सरकार को जल्द नियुक्ति करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए। साथ ही यह भी चेतावनी दी कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो अदालत कड़े आदेश देने के लिए स्वतंत्र होगी।
पहले भी तय की गई थी समय सीमा
इससे पहले भी हाईकोर्ट राज्य सरकार को लोकायुक्त और अन्य आयोगों में नियुक्ति के लिए समयसीमा दे चुका है। अदालत ने छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति पूरी करने और अन्य पदों पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
अगली सुनवाई कब?
मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च तय की गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार तय समय में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर पाती है या नहीं।
क्यों जरूरी हैं ये नियुक्तियां?
विशेषज्ञों के अनुसार, लोकायुक्त और अन्य आयोगों की भूमिका शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में अहम होती है। इन पदों के खाली रहने से शिकायत निवारण और प्रशासनिक निगरानी प्रभावित होती है।
झारखंड में संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्ति का मुद्दा अब गंभीर होता जा रहा है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी।









