सोशल संवाद/डेस्क : देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच आम लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। ऐसे समय में थोड़ी सी सावधानी और सही तरीके अपनाकर न केवल गैस की खपत कम की जा सकती है, बल्कि घर के बजट को भी संभाला जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रसोई में कुछ छोटे-छोटे बदलाव किए जाएं, तो एक गैस सिलेंडर सामान्य से 10 से 15 दिन अधिक चल सकता है।

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घबराहट में न करें पैनिक खरीदारी
गैस की कमी की खबरें सामने आने पर कई लोग एक साथ कई सिलेंडर जमा करने की कोशिश करते हैं। लेकिन ऐसा करने से कृत्रिम कमी की स्थिति पैदा हो जाती है। बेहतर है कि जैसे ही सिलेंडर आधा खाली हो जाए, तुरंत अगली बुकिंग कर दी जाए। इससे अंतिम समय में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

इसके अलावा अपने गैस प्रदाता के मोबाइल ऐप या ऑनलाइन सेवा के जरिए डिलीवरी की स्थिति को ट्रैक करना भी फायदेमंद होता है। इससे उपभोक्ता को यह पता रहता है कि सिलेंडर कब तक पहुंचेगा और अनावश्यक भागदौड़ से बचा जा सकता है।
रसोई में अपनाएं ये 10 आसान तरीके
रोजमर्रा के खाना बनाने के तरीके में थोड़ा बदलाव कर गैस की खपत काफी कम की जा सकती है। उदाहरण के लिए, खाना बनाते समय बर्तनों को ढककर पकाने से गैस कम लगती है और खाना जल्दी तैयार हो जाता है। दाल, चावल या सब्जी बनाने के लिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करना भी गैस बचाने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार कुकर का उपयोग करने से करीब 20 प्रतिशत तक गैस की बचत हो सकती है।

खाना बनाते समय बहुत तेज आंच का इस्तेमाल करने से भी गैस की बर्बादी होती है। तेज आंच अक्सर बर्तन के किनारों से बाहर निकल जाती है और बेकार चली जाती है। इसलिए मीडियम या धीमी आंच पर खाना पकाना ज्यादा बेहतर होता है। इसके अलावा खाना पकाने से पहले सारी तैयारी कर लेना भी जरूरी है। कई बार लोग चूल्हा जलाकर ही सब्जी काटना या मसाले तैयार करना शुरू कर देते हैं, जिससे गैस बेवजह खर्च होती रहती है।
छोटी-छोटी सावधानियां भी जरूरी
रसोई गैस बचाने के लिए यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बर्तन पूरी तरह सूखे हों। गीले बर्तन को चूल्हे पर सुखाने में अतिरिक्त गैस खर्च होती है। इसी तरह फ्रिज से निकाली गई ठंडी चीजों को सीधे गैस पर रखने के बजाय पहले सामान्य तापमान पर आने देना चाहिए।

इसके साथ ही समय-समय पर गैस बर्नर की सफाई भी जरूरी है। यदि बर्नर की लौ पीली या नारंगी दिखाई दे रही है, तो इसका मतलब है कि गैस ठीक से जल नहीं रही और उसकी बर्बादी हो रही है। साफ बर्नर में लौ नीली दिखाई देती है, जो सही दहन का संकेत है।
कालाबाजारी से भी रहें सावधान
गैस की किल्लत के दौरान कई जगह कालाबाजारी के मामले भी सामने आते हैं। इसलिए सिलेंडर लेते समय उसका वजन जरूर जांचें और यह सुनिश्चित करें कि उस पर लगी सील सही स्थिति में हो। घरेलू गैस सिलेंडर में सामान्यतः 14.2 किलोग्राम गैस होती है, जिसका कुल वजन सिलेंडर पर अंकित रहता है।

यदि कोई डिलीवरी कर्मचारी निर्धारित कीमत से अधिक पैसे मांगता है, तो इसकी शिकायत एजेंसी या हेल्पलाइन पर की जा सकती है। बिना पर्ची या अनधिकृत विक्रेताओं से गैस खरीदना भी जोखिम भरा हो सकता है।
स्मार्ट किचन से होगी बचत
विशेषज्ञों का कहना है कि गैस की बचत केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आदतों पर निर्भर करती है। यदि घर का हर सदस्य थोड़ी सावधानी बरते और सही तरीके अपनाए, तो गैस सिलेंडर लंबे समय तक चल सकता है। कुल मिलाकर, बढ़ती महंगाई और गैस संकट के दौर में समझदारी से खाना पकाने की आदत न केवल LPG की बचत कर सकती है, बल्कि परिवार के खर्च को भी काफी हद तक कम कर सकती है।









