सोशल संवाद/राँची: शराब घोटाला मामले में रांची के सिविल कोर्ट परिसर स्थित न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पूर्वी सिंहभूम जिले के उपायुक्त IAS कर्ण सत्यार्थी ने मंगलवार को अपना बयान कमलबद्ध कराया है। आइएएस अधिकारी कर्ण सत्यार्थी उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व आयुक्त उत्पाद सह झारखंड स्टेट बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड के पूर्व प्रबंध निदेशक थे। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 183 के तहत उक्त बयान दर्ज कराया है।

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उनके बयान की कापी को भी सीलबंद करके एसीबी कोर्ट में सुपुर्द किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार आइएएस कर्ण सत्यार्थी ने भी शराब घोटाले के पीछे पूर्व उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे का हाथ होने की जानकारी दी है।
सीलबंद लिफाफा खुलने तक पूरा बयान नहीं हो सकेगा स्पष्ट हालांकि, जब तक सीलबंद लिफाफा नहीं खुलेगा, तब तक उनका पूरा बयान स्पष्ट नहीं हो सकेगा। शराब घोटाला मामले की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) झारखंड की टीम ने पूर्व में भी आइएएस अधिकारी कर्ण सत्यार्थी से लगातार तीन दिनों तक पूछताछ की थी।
पूर्व उत्पाद आयुक्त कर्ण सत्यार्थी पर आरोप है कि पूर्व की उत्पाद नीति के दौरान शराब की खुदरा दुकानों में फर्जी बैंक गारंटी पर मैनपावर आपूर्ति का ठेका लेने वाली दोनों प्लेसमेंट एजेंसियों के विरुद्ध उन्होंने मामला उजागर होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। इन दोनों ही प्लेसमेंट एजेंसियों में मेसर्स मार्शन व मेसर्स विजन शामिल हैं। उनके विरुद्ध न तो प्राथमिकी दर्ज की, न हीं कोई कानूनी कार्रवाई की। इतना ही नहीं, उनके कार्यकाल में भी प्रदेश में एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब की बिक्री के मामले सामने आते रहे, लेकिन उसे रोकने के लिए उन्होंने कोई ठोस पहल नहीं की।
गौरतलब है कि एक दिन पहले 15 दिसंबर को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व आयुक्त उत्पाद अमीत कुमार का भी न्यायिक दंडाधिकारी के सामने बीएनएसएस 183 के तहत बयान दर्ज कराया गया है। उनके बयान की की कापी को भी सीलबंद करने के बाद एसीबी कोर्ट में रखा गया है। एक-एक कर सभी बयान की समीक्षा होगी और उसके आधार पर जो अधिकारी दोषी मिलेंगे, उनके विरुद्ध एसीबी न्यायालय से कार्रवाई की अनुशंसा करेगी।










