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नरेंद्र मोदी की नीतियों का भारतीय अर्थव्यवस्था, MSME और मध्यम वर्ग पर प्रभाव

By Nidhi Mishra

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 सोशल संवाद /डेस्क : ( सिद्धार्थ प्रकाश) 2014 में सत्ता में आने के बाद, नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों ने भारत के मध्यम वर्ग, MSME क्षेत्र और समग्र आर्थिक स्थिरता पर गहरा असर डाला है। सरकार ने अपनी नीतियों को विकासोन्मुख बताया, लेकिन हकीकत में इनसे आर्थिक असमानता, औद्योगिक पतन और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विभाजन को बढ़ावा मिला। यह रिपोर्ट इस बात की गहरी समीक्षा करती है कि मोदी की नीतियों ने कैसे भारत के मध्यम वर्ग को कमजोर किया, MSME सेक्टर को बर्बाद किया और पिछले 11 वर्षों में आर्थिक मंदी को जन्म दिया। इसके अलावा, यह अध्ययन इस पर भी प्रकाश डालता है कि मोदी की सरकार लद्दाख, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और तमिलनाडु के लिए क्यों नुकसानदेह रही है।

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भारतीय मध्यम वर्ग का पतन

1. नोटबंदी (2016):* ‘ब्लैक मनी पर सर्जिकल स्ट्राइक’ बताकर लागू की गई इस नीति ने छोटे व्यापारियों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की कमर तोड़ दी।

2. *GST का जंजाल (2017):* ‘गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स’ को ‘गंभीर सिरदर्द टैक्स’ में बदल दिया गया। जटिल टैक्स ढांचे ने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी।

3. बेरोजगारी की सुनामी:* ‘हर साल 2 करोड़ नौकरियां’ देने का वादा कब ‘पकौड़ा बेचने’ तक सिमट गया, पता ही नहीं चला।

4. महंगाई की मार:* पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर के दाम इस तेजी से बढ़े कि मध्यम वर्ग को अपना बजट भूलकर सर्वाइव करने के लिए नए तरीके खोजने पड़े।

5. निजीकरण की धुन:* सरकारी नौकरियों की संख्या घटी और निजीकरण की आंधी में स्टेबल जॉब्स हवा हो गईं।

मोदी सरकार की नीतियों ने MSME को कैसे किया बर्बाद

1. नोटबंदी का सदमा:* MSME सेक्टर का 50% से ज्यादा हिस्सा कैश फ्लो की समस्या के कारण बंद हो गया।

2. GST का बोझ:* छोटे व्यापारियों को टैक्स भरने से ज्यादा चार्टर्ड अकाउंटेंट की फीस देने में वक्त और पैसा लगाना पड़ा।

3. वित्तीय सहायता का अभाव:* ‘मेक इन इंडिया’ सिर्फ एक नारा बनकर रह गया, लोन तो बड़े उद्योगपतियों को ही मिले।

4. लॉकडाउन का कहर (2020):* बिना प्लानिंग के लगाए गए लॉकडाउन ने MSME सेक्टर की कमर तोड़ दी।

5. आयात निर्भरता:* ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा दे दिया, लेकिन चीन से इंपोर्ट का ग्राफ बढ़ता ही रहा।

मोदी सरकार में आर्थिक मंदी का दौर

1. GDP ग्रोथ की गिरावट:* 2015-16 में 8% GDP ग्रोथ से गिरकर 2019-20 में 4% तक आ गई, और इसका दोष भी कोरोना पर डाल दिया गया।

2. कृषि संकट:* मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों ने किसानों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया।

3. राजकोषीय घाटा:* सरकारी खर्चों और कर्ज के चलते देश की अर्थव्यवस्था कमजोर होती चली गई।

4. धन-संपत्ति में असमानता:* कुछ उद्योगपति अमीर होते गए, जबकि गरीबों की थाली छोटी होती चली गई।

5. रोजगार के खोखले वादे:* ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसी योजनाएं सिर्फ कागजों पर सजी रहीं।

मोदी सरकार लद्दाख, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, यूपी, बिहार, ओडिशा, बंगाल, तेलंगाना और तमिलनाडु के लिए क्यों घातक?

लद्दाख

अनुच्छेद 370 की समाप्ति:* लद्दाख को बिना किसी स्पष्ट रोडमैप के अलग कर दिया गया, जिससे क्षेत्रीय असंतोष बढ़ा।

चीन की घुसपैठ:* सरकार ने चीन की घुसपैठ पर ’56 इंच’ का दावा छोड़कर चुप्पी साध ली।

पंजाब

किसान आंदोलन:* तीन काले कृषि कानूनों ने पंजाब की रीढ़ तोड़ दी।

उद्योगों की अनदेखी:* व्यापार और कृषि के बीच कोई संतुलन नहीं बनाया गया।

हिमाचल प्रदेश

पर्यटन पर असर:* अव्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर और महंगाई के कारण टूरिज्म सेक्टर प्रभावित हुआ।

रोजगार की कमी:* युवाओं का पलायन तेज़ी से बढ़ा।

उत्तर प्रदेश और बिहार

सांप्रदायिक तनाव:* ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा ‘धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण’ में बदल गया।

औद्योगिक विकास का अभाव:* नए कारखाने नहीं खुले, रोजगार के अवसर नहीं बढ़े।

ओडिशा

खनन माफिया का दबदबा:* स्थानीय लोगों को फायदा पहुंचाने के बजाय कॉर्पोरेट को फायदा दिया गया।

चक्रवात प्रबंधन की असफलता:* प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में सरकार असफल रही।

 पश्चिम बंगाल

राजनीतिक हस्तक्षेप:* केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच खींचतान के चलते विकास बाधित हुआ।

बेरोजगारी:* MSME सेक्टर कमजोर होने से जॉब के मौके घटे।

तेलंगाना और तमिलनाडु

दक्षिण भारत की अनदेखी:* GDP में बड़ा योगदान देने के बावजूद बजट में इन राज्यों को कम हिस्सेदारी दी गई।

हिंदी थोपने की कोशिश:* भाषा की राजनीति ने तमिलनाडु को केंद्र से दूर किया।

IT और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट:* ‘डिजिटल इंडिया’ के बावजूद IT सेक्टर को कोई बड़ा फायदा नहीं हुआ।

मोदी की नीतियां भारत को दो हिस्सों में कैसे बांट रही हैं?

हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण:* CAA-NRC जैसे कानूनों से देश को सांप्रदायिक आधार पर बांटा जा रहा है।

अमीर-गरीब की खाई:* अडानी-अंबानी मालामाल होते गए, गरीबों की जेब खाली होती गई।

केंद्र-राज्य टकराव:* मोदी सरकार ने ‘फेडरल स्ट्रक्चर’ को कमजोर कर दिया।

नरेंद्र मोदी की नीतियों ने पिछले 11 वर्षों में भारत के मध्यम वर्ग, MSME और अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इन नीतियों ने देश को विकास की बजाय असमानता, बेरोजगारी और सामाजिक विभाजन की ओर धकेल दिया है। यदि भारत को आर्थिक और सामाजिक स्थिरता की ओर वापस ले जाना है, तो पारदर्शी और समावेशी नीतियों की जरूरत है।

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