सोशल संवाद/डेस्क: हाल के दिनों में देश के कई टैक्सपेयर्स को Income Tax Department की ओर से ईमेल या मैसेज मिला है, जिसमें बैंक डिपॉजिट, प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त, शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश जैसे हाई वैल्यू ट्रांजैक्शंस का उल्लेख किया गया है। इस संदेश को लेकर कई लोगों में भ्रम था कि कहीं यह स्कैम या फर्जी नोटिस तो नहीं है।
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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने स्पष्ट किया है कि यह मैसेज पूरी तरह असली और आधिकारिक एडवाइजरी है। यह केवल उन्हीं टैक्सपेयर्स को भेजा गया है, जिनकी इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाई गई जानकारी और बैंकों, म्यूचुअल फंड हाउस या अन्य रिपोर्टिंग संस्थाओं से मिली जानकारी में बड़ा अंतर पाया गया है।
विभाग के अनुसार, इस एडवाइजरी का उद्देश्य डराना या तुरंत पेनल्टी लगाना नहीं है। सरकार चाहती है कि टैक्सपेयर्स अपने रिकॉर्ड खुद जांचें और अगर किसी तरह की गलती या चूक हुई है, तो समय रहते उसे ठीक कर लें। यह जानकारी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी AIS के जरिए सामने आती है, जिसमें विभिन्न वित्तीय संस्थानों से मिले ट्रांजैक्शंस दर्ज होते हैं।
अगर किसी टैक्सपेयर को ऐसा मैसेज मिला है, तो उसे incometax.gov.in पर लॉगिन कर कंप्लायंस पोर्टल में जाकर AIS और TIS की जांच करनी चाहिए। गलत जानकारी होने पर वहीं से फीडबैक दिया जा सकता है, जबकि अपनी गलती होने पर रिवाइज्ड या बिलेटेड रिटर्न फाइल करना सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
आकलन वर्ष 2025-26 के लिए रिवाइज्ड या बिलेटेड आईटीआर भरने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 तय की गई है। इसके बाद सुधार का मौका नहीं मिलेगा और भविष्य में नोटिस, पेनल्टी व ब्याज का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही किसी को मैसेज न आया हो, फिर भी AIS चेक कर लेना समझदारी है, ताकि आगे किसी परेशानी से बचा जा सके।










