सोशल संवाद/डेस्क : भारतीय रेलवे ने वन्यजीव संरक्षण और अपनी तकनीकी शक्ति के अद्भुत संगम का प्रदर्शन करते हुए एक नया इतिहास रचा है। हावड़ा रेलवे स्टेशन से एक विशेष WAP-7 (वाइड गेज एसी पैसेंजर) इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को ट्रैक पर उतारा गया है, जिसे ‘मुखी’ नाम दिया गया है।
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कौन है ‘मुखी’ और क्यों है यह खास?
यह इंजन न केवल अपनी रफ्तार के लिए जाना जाएगा, बल्कि यह भारत के ‘प्रोजेक्ट चीता’ की सफलता का गौरवशाली प्रतीक भी है। इस लोकोमोटिव का नाम नामीबिया से लाए गए चीतों के कुनबे की सदस्य और मादा चीता ‘ज्वाला’ की संतान ‘मुखी’ के नाम पर रखा गया है।
‘मुखी’ ने नवंबर 2025 में पांच स्वस्थ शावकों को जन्म देकर भारत में चीतों के पुनरुद्धार अभियान (Project Cheetah) में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया था। वह भारत की धरती पर स्वस्थ प्रजनन करने वाली पहली चीता बनी है।
इसी ऐतिहासिक उपलब्धि को सम्मान देने के लिए रेलवे ने इस इंजन को चीते की गति, चपलता और भव्यता के प्रतीकात्मक चित्रों से सजाया है।
आधुनिक तकनीकों से लैस है यह इंजन
WAP-7 39178 नंबर का यह लोकोमोटिव केवल देखने में ही भव्य नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा और दक्षता के मामले में भी बेजोड़ है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं
कवच प्रणाली: यह इंजन ‘कवच’ (ट्रेन सुरक्षा प्रणाली) से सुसज्जित है, जो दो ट्रेनों की टक्कर को रोकने में सक्षम है।
वातानुकूलित केबिन: लोको पायलटों की सुविधा और एकाग्रता के लिए इसका ड्राइवर केबिन पूरी तरह वातानुकूलित बनाया गया है।
स्मार्ट मॉनिटरिंग: इसमें रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम लगा है, जिससे इंजन की कार्यक्षमता पर दूर से नजर रखी जा सकती है।
उच्च शक्ति: 6000 हॉर्सपावर से अधिक की क्षमता वाला यह इंजन लंबी दूरी की प्रीमियम ट्रेनों को तेज रफ्तार देने के लिए डिजाइन किया गया है।
संरक्षण और प्रगति का संदेश
भारतीय रेलवे की इस पहल का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2022 को शुरू किए गए ‘प्रोजेक्टचीता’ के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है। यह लोकोमोटिव इस बात का संदेश है कि भारत एक ओर जहां अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी विलुप्त होती जैव-विविधता के संरक्षण के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।










