सोशल संवाद/डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए संकेत दिया कि एक बड़ी कार्रवाई होने वाली है, जिससे पूरी सभ्यता को नुकसान पहुंच सकता है। हालात ऐसे बन गए थे कि सैन्य टकराव लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन ऐन वक्त पर ईरान की एक रणनीति ने पूरा समीकरण बदल दिया।
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सूत्रों के मुताबिक, संभावित हमले से बचने के लिए ईरान ने अपने महत्वपूर्ण ठिकानों और पावर प्लांट्स के आसपास बड़ी संख्या में युवाओं को तैनात कर दिया। इस कदम को ‘ह्यूमन शील्ड’ के तौर पर देखा गया, जिस पर ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे गैरकानूनी और बेईमानी बताया। उनका कहना था कि आम नागरिकों को इस तरह इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।
इसी बीच Pakistan ने कूटनीतिक पहल करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश की। इस्लामाबाद ने दोनों देशों को 2 हफ्तों के सीजफायर का प्रस्ताव भेजा, ताकि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके। शुरुआत में ट्रंप ने इस पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा कि मामला अभी बेहद संवेदनशील दौर में है।
हालांकि, कई घंटों की बातचीत के बाद अमेरिका ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और ईरान के साथ सीजफायर को 2 हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया। दोनों पक्ष अब 10 सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर आगे शांति वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए हैं। फिलहाल टकराव टल गया है, लेकिन हालात अब भी नाजुक बने हुए हैं।









