सोशल संवाद/डेस्क: स्मार्टफोन में Aadhaar App को प्री-इंस्टॉल करने की खबरों के बीच अब सरकार और उद्योग जगत ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सरकार इस दिशा में कदम उठाने पर विचार कर रही है, जिस पर टेक इंडस्ट्री की ओर से आपत्ति जताई गई थी। हालांकि, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI और उद्योग संगठन MAIT दोनों ने साफ किया है कि यह केवल शुरुआती स्तर की चर्चा है और इसे अनिवार्य बनाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है।
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दरअसल, नवंबर 2025 में UIDAI ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें सुझाव दिया गया था कि नया आधार ऐप स्मार्टफोन में पहले से मौजूद हो, ताकि कम स्टोरेज या बेसिक डिवाइस इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को सुविधा मिल सके। अधिकारियों के मुताबिक, यदि ऐप प्री-इंस्टॉल भी होता है, तो यूजर्स के पास उसे हटाने का विकल्प हमेशा रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे अन्य प्री-लोडेड ऐप्स को हटाया जा सकता है।
उद्योग संगठन MAIT ने इस मुद्दे पर आई खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया है और कहा है कि यह केवल परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा था, न कि कोई आधिकारिक निर्देश। संगठन ने नीति-निर्माण की पारदर्शी प्रक्रिया की सराहना करते हुए जिम्मेदार रिपोर्टिंग की जरूरत पर भी जोर दिया है।
गौरतलब है कि UIDAI ने हाल ही में नया आधार ऐप लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य डिजिटल वेरिफिकेशन को अधिक सुरक्षित बनाना और फिजिकल आधार कार्ड के दुरुपयोग को रोकना है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिजिकल आधार कार्ड को समाप्त करने की कोई योजना नहीं है।
कुल मिलाकर, आधार ऐप को लेकर फिलहाल कोई अनिवार्यता नहीं है और यह सिर्फ यूजर्स की सुविधा के लिए विचाराधीन एक प्रस्ताव है, जिस पर आगे भी चर्चा जारी रहेगी।









