सोशल संवाद / डेस्क : Gmail यूज़र्स की प्राइवेसी को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हाल के दावों के मुताबिक, Google अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए यूज़र्स के ईमेल डेटा को एक्सेस कर सकता है।
यह भी पढे : 2026 से निजी कार-बाइक का फिटनेस व PUC टेस्ट ATS सेंटर पर होगा, रोड सेफ्टी और प्रदूषण नियंत्रण होगा मजबूत
कहा जा रहा है कि Gmail में पहले से चालू कुछ एडवांस्ड फीचर्स AI को पर्सनल ईमेल, डॉक्यूमेंट्स और अटैचमेंट को एक्सेस करने की इजाज़त दे सकते हैं। यही वजह है कि अब यूज़र्स को अपनी Gmail सेटिंग्स पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
Gmail को लेकर नया हंगामा क्यों हो रहा है?
इंजीनियरिंग YouTuber और टेक एक्सपर्ट डेवेरी जोन्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि कई Gmail यूज़र्स ने अनजाने में ही AI ट्रेनिंग के लिए सहमति दे दी है। उनके मुताबिक, कुछ Gmail सेटिंग्स ईमेल कंटेंट को AI मॉडल के साथ शेयर करने की इजाज़त देती हैं। उन्होंने इसे एक गंभीर प्राइवेसी रिस्क बताया, और कहा कि अगर यूज़र्स इन ऑप्शन को मैन्युअल रूप से डिसेबल नहीं करते हैं, तो डेटा एक्सेस जारी रह सकता है।

कौन से स्मार्ट फीचर्स चिंता बढ़ा रहे हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Gmail के स्मार्ट फीचर्स और वर्कस्पेस स्मार्ट फीचर्स इस पूरे मामले की जड़ हैं। ये फीचर्स ही Ask Gemini, ईमेल समरी, स्मार्ट रिप्लाई और गूगल असिस्टेंट जैसे टूल्स को पावर देते हैं। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये सभी AI फीचर्स सीधे यूज़र इनबॉक्स डेटा पर निर्भर करते हैं। जब तक ये फीचर्स चालू रहेंगे, AI को ईमेल डेटा से पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता।
Gmail में AI एक्सेस को कैसे ब्लॉक करें
अगर कोई यूज़र Gmail में AI के दखल को कम करना चाहता है, तो उसे अपनी सेटिंग्स बदलनी होंगी। डेस्कटॉप या लैपटॉप पर Gmail खोलने के बाद, “सभी सेटिंग्स देखें” पर जाएं और स्मार्ट फीचर्स ऑप्शन को डिसेबल कर दें। अलग से वर्कस्पेस स्मार्ट फीचर्स सेटिंग्स में जाकर दूसरे Google प्रोडक्ट्स से जुड़े स्मार्ट ऑप्शन को डिसेबल करना भी ज़रूरी है। इन बदलावों के बिना, AI एक्सेस पूरी तरह खत्म नहीं होता है।
Google ने आरोपों पर क्या सफाई दी?
Google ने इन दावों को खारिज करते हुए साफ कहा है कि Gmail यूज़र्स के ईमेल डेटा का इस्तेमाल AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए नहीं किया जाता है। कंपनी के मुताबिक, डेटा का इस्तेमाल सिर्फ फीचर्स के सही ऑपरेशन और प्रोसेसिंग के लिए किया जाता है। हालांकि, कई साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि Gemini जैसे AI फीचर्स यूज़र डेटा पर बहुत ज़्यादा निर्भर करते हैं। इसके अलावा, Gmail की सेटिंग्स इतनी कॉम्प्लेक्स हैं कि आम यूज़र यह नहीं समझ पाता कि कौन से ऑप्शन उसकी प्राइवेसी को प्रभावित कर रहे हैं।

प्राइवेसी को लेकर सतर्क रहना क्यों ज़रूरी है?
डिजिटल युग में, ईमेल सिर्फ मैसेज भेजने का ज़रिया नहीं रहा; इसमें बैंकिंग, ऑफिस और पर्सनल जानकारी भी होती है। इसलिए, अगर कोई यूज़र अपनी सेटिंग्स को नज़रअंदाज़ करता है, तो उसकी प्राइवेसी अनजाने में खतरे में पड़ सकती है। इसलिए, सबसे अच्छा है कि आप समय-समय पर Gmail सेटिंग्स चेक करते रहें और गैर-ज़रूरी स्मार्ट फीचर्स को डिसेबल कर दें।










