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संविधान के अनुच्छेद 67(A) के तहत उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा, देश में बना अहम मिसाल

By Aditi Pandey

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Jagdeep Dhankhar resignation under Article 67(A)

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सोशल संवाद/डेस्क: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह फैसला संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले संविधान के अनुच्छेद 67(A) के तहत लिया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखित रूप में अपना त्यागपत्र सौंपा। धनखड़ ने अपने पत्र में स्वास्थ्य कारणों और चिकित्सकीय सलाह का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने की बात कही है।

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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 67 उपराष्ट्रपति के कार्यकाल और पद से हटने की प्रक्रिया को परिभाषित करता है। इसके खंड (A) के अनुसार उपराष्ट्रपति स्वेच्छा से राष्ट्रपति को लिखित इस्तीफा देकर पद छोड़ सकते हैं, जबकि खंड (B) में संसद के माध्यम से उन्हें हटाने की प्रक्रिया का उल्लेख है। भारत के 75 वर्षों के संवैधानिक इतिहास में यह केवल दूसरी बार है जब किसी उपराष्ट्रपति ने अनुच्छेद 67(A) के तहत इस्तीफा दिया है। इससे पहले वर्ष 1969 में वीवी गिरी ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दिया था और बाद में वे देश के राष्ट्रपति बने।

हालांकि जगदीप धनखड़ का मामला वीवी गिरी से अलग माना जा रहा है। जहां वीवी गिरी ने राजनीतिक कारणों से पद छोड़ा था, वहीं धनखड़ का निर्णय पूरी तरह स्वास्थ्य से जुड़ा बताया जा रहा है। उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और सरकार व विपक्ष के बीच माहौल पहले से ही तनावपूर्ण माना जा रहा था। पिछले सत्रों में धनखड़ का सख्त रुख और विपक्ष के साथ उनके मतभेद चर्चा में रहे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ उनकी नोकझोंक ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। वर्ष 2024 में विपक्ष द्वारा उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की कोशिश भी असफल रही थी।

इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति का पद रिक्त हो गया है। संविधान के प्रावधानों के अनुसार, नए उपराष्ट्रपति के निर्वाचन तक राज्यसभा की कार्यवाही डिप्टी चेयरमैन द्वारा संचालित की जाएगी। अब राष्ट्रपति द्वारा नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति पद संभालने वाले जगदीप धनखड़ ने अपने विदाई संदेश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रिपरिषद और संसद के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने कार्यकाल को देश के “परिवर्तनकारी युग” में सेवा का अवसर बताया और कहा कि भारत के आर्थिक और वैश्विक विकास का साक्षी बनना उनके लिए गर्व की बात रही।

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