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भारतीय वायुसेना के जगुआर लड़ाकू विमानों को मिलेगा नया अपग्रेड, अत्याधुनिक मिसाइल और सिस्टम से बढ़ेगी ताकत

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : भारतीय वायुसेना अपनी युद्ध क्षमता को और मजबूत करने के लिए लगातार आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी कड़ी में अब वायुसेना के जगुआर लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने का फैसला लिया गया है। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए घरेलू कंपनियों से टेंडर आमंत्रित किए हैं।

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इस परियोजना का उद्देश्य इन विमानों की तकनीकी क्षमता को आधुनिक बनाना और हवाई युद्ध में उनकी प्रभावशीलता को बढ़ाना है। अपग्रेड के बाद ये विमान आधुनिक मिसाइलों और उन्नत सिस्टम से लैस होंगे, जिससे पायलट को अधिक सटीक और तेज प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी।

कुल 74 विमानों में किया जाएगा बदलाव

इस योजना के तहत भारतीय वायुसेना के कुल 74 जगुआर लड़ाकू विमानों को अपग्रेड किया जाएगा। इनमें दो अलग-अलग वेरिएंट शामिल हैं। इनमें 24 जगुआर डारिन-II और 50 जगुआर डारिन-III विमान शामिल हैं। अपग्रेड प्रक्रिया के दौरान इन विमानों में कई तकनीकी बदलाव किए जाएंगे, जिससे उनकी युद्ध क्षमता और संचालन प्रणाली पहले से अधिक आधुनिक हो सकेगी।

नई मिसाइल प्रणाली से बढ़ेगी ताकत

अपग्रेड के दौरान जगुआर विमानों में इस्तेमाल होने वाली पुरानी एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली को हटाकर नई पीढ़ी की मिसाइल लगाई जाएगी। यह मिसाइल कम दूरी की हवाई लड़ाई के लिए अधिक प्रभावी मानी जाती है। नई मिसाइल के जरिए विमान दुश्मन के लक्ष्यों को तेजी से पहचानकर हमला करने में सक्षम होंगे। इससे हवाई मुकाबले के दौरान प्रतिक्रिया समय भी कम होगा और सटीकता भी बढ़ेगी।

हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले सिस्टम भी होगा शामिल

अपग्रेड के तहत पायलट के लिए हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले सिस्टम भी लगाया जाएगा। यह एक आधुनिक तकनीक है जिसके जरिए पायलट अपने हेलमेट के वाइजर पर ही महत्वपूर्ण जानकारी देख सकेगा।

इस तकनीक से पायलट को उड़ान के दौरान लक्ष्य से जुड़ी जानकारी तुरंत मिल जाएगी। इसके अलावा पायलट सिर घुमाकर ही लक्ष्य की दिशा में मिसाइल को लॉक कर सकेगा, जिससे युद्ध के दौरान निर्णय लेने की गति काफी तेज हो जाएगी।

कई एयरबेस पर होगा अपग्रेड

जगुआर विमानों के अपग्रेड का काम भारतीय वायुसेना के कई प्रमुख एयरबेस पर किया जाएगा। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित एयरबेस शामिल होंगे। तकनीकी परीक्षण और मूल्यांकन का काम बेंगलुरु स्थित विमानन संस्थानों में किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में विमान परीक्षण और तकनीकी विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।

केवल भारतीय कंपनियों को मिलेगा मौका

सरकार की आत्मनिर्भर भारत नीति को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना में केवल भारतीय रक्षा कंपनियों को भाग लेने का अवसर दिया जाएगा। टेंडर में हिस्सा लेने वाली कंपनियों के पास सैन्य विमानों के संशोधन और एयरोस्पेस तकनीक का अनुभव होना जरूरी होगा। साथ ही उन्हें जरूरी तकनीकी प्रमाणन भी प्राप्त होना चाहिए।

तीन साल में पूरा होगा काम

सरकार की योजना के अनुसार चयनित कंपनी को तीन साल के भीतर सभी 74 विमानों का अपग्रेड पूरा करना होगा।बताया जा रहा है कि हर विमान में तकनीकी बदलाव और परीक्षण का काम लगभग डेढ़ महीने के भीतर पूरा किया जा सकता है।

क्यों अहम है जगुआर विमान

जगुआर लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना का लंबे समय से महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। इन्हें खास तौर पर कम ऊंचाई पर हमला करने वाले मिशनों के लिए जाना जाता है। हालांकि अब वायुसेना आधुनिक विमानों को शामिल कर रही है, लेकिन अपग्रेड के बाद जगुआर विमान आने वाले वर्षों तक वायुसेना की ताकत का अहम हिस्सा बने रहेंगे।

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