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Jamshedpur: संताली फिल्म ‘आंगेन’ को National Film Award, निर्देशक Ravi Raj Murmu हुए सम्मानित

By Riya Kumari

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Jamshedpur: संताली फिल्म ‘आंगेन’ को National Film Award, निर्देशक Ravi Raj Murmu हुए सम्मानित
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सोशल संवाद / जमशेदपुर: झारखंड के संताली सिनेमा के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। संताली लघु फिल्म ‘आंगेन’ के निर्देशक रवि राज मुर्मू को 72वें National Film Awards में Best Debut Film of a Director (Non-Feature) का पुरस्कार मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित समारोह में उन्हें सम्मानित किया।

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पहली बार संताली फिल्म को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान

‘आंगेन’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में संताली भाषा की पहली फिल्म के रूप में यह सम्मान मिला है। PIB के अनुसार, 72वें National Film Awards के Non-Feature Film सेक्शन में पहली बार किसी संताली फिल्म को सम्मानित किया गया। फिल्म के निर्देशक रवि राज मुर्मू हैं।

यह 12 मिनट की संताली शॉर्ट फिल्म है, जो स्थानीय लोककथाओं और आदिवासी समाज की कहानी कहती है। फिल्म का नाम ‘आंगेन’ है, जिसका अर्थ मोटे तौर पर अदृश्य, अनदेखा या नजरों से ओझल होने से जुड़ा है।

जादूगोड़ा क्षेत्र से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचे रवि राज

रवि राज मुर्मू झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा क्षेत्र से जुड़े फिल्म निर्देशक हैं। स्थानीय लोककथाओं और आदिवासी समाज की मौखिक परंपराओं से प्रभावित होकर उन्होंने फिल्म निर्माण की दिशा में काम शुरू किया।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘आंगेन’ की कहानी पर रवि राज मुर्मू कई वर्षों से काम कर रहे थे। मूल रूप से इसे फीचर फिल्म के रूप में बनाने की योजना थी, लेकिन फंडिंग नहीं मिलने के कारण इसे शॉर्ट फिल्म का रूप दिया गया।

संताली सिनेमा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

‘आंगेन’ को मिले राष्ट्रीय सम्मान को संताली सिनेमा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। फिल्म ने संताली भाषा, स्थानीय संस्कृति और आदिवासी समाज की कहानियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

PIB के अनुसार, 72वें National Film Awards में भारतीय सिनेमा की कई भाषाओं की फिल्मों को सम्मान मिला, जिसमें पहली बार Non-Feature Film श्रेणी में संताली भाषा की फिल्म भी शामिल हुई।

राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद झारखंड के फिल्म कलाकारों और संताली सिनेमा से जुड़े लोगों में भी उत्साह है। यह उपलब्धि स्थानीय भाषा और लोककथाओं पर आधारित फिल्मों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की संभावनाओं को मजबूत करती है।

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