सोशल संवाद / झारखंड : कम बारिश की आशंका को देखते हुए झारखंड सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के लिए बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू कर दी है। इस योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर केवल ₹1 के प्रीमियम पर फसल बीमा का लाभ मिलेगा। फसल को प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से नुकसान होने पर किसानों को बीमित राशि का अधिकतम 80 प्रतिशत तक मुआवजा दिया जाएगा। राज्य सरकार की यह योजना झारखंड के सभी 24 जिलों में लागू होगी।

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किन फसलों का होगा बीमा?
योजना के तहत फिलहाल दो प्रमुख खरीफ फसलों को शामिल किया गया है।
- अगहनी धान
- भदई मकई
इन दोनों फसलों का बीमा मात्र ₹1 प्रति हेक्टेयर के प्रीमियम पर कराया जा सकेगा।
जिलेवार बीमित राशि
झारखंड सरकार ने अलग-अलग जिलों के लिए अलग बीमित राशि तय की है।
पलामू
- अगहनी धान: ₹69,287 प्रति हेक्टेयर
- भदई मकई: ₹52,261 प्रति हेक्टेयर
गढ़वा
- अगहनी धान: ₹81,936 प्रति हेक्टेयर
- भदई मकई: ₹47,653 प्रति हेक्टेयर
लातेहार
- अगहनी धान: ₹73,836 प्रति हेक्टेयर
- भदई मकई: ₹58,340 प्रति हेक्टेयर
फसल क्षति की स्थिति में किसानों को निर्धारित बीमित राशि का अधिकतम 80% तक मुआवजा दिया जाएगा।
आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई गई
सहकारिता विभाग ने इस योजना की अधिसूचना 20 जुलाई 2026 को जारी की थी। पहले आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई थी, लेकिन अब इसे एक माह के लिए बढ़ा दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक किसान योजना का लाभ उठा सकें।
ऋणी और गैर-ऋणी दोनों किसान उठा सकेंगे लाभ
इस योजना का लाभ ऋणी (Loanee) और गैर-ऋणी (Non-Loanee) दोनों प्रकार के किसान ले सकते हैं। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को फसल सुरक्षा प्रदान करना है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का बदला नाम
झारखंड सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का नाम बदलकर बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना कर दिया है।
जिलों में बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी इस प्रकार तय की गई है:
- पलामू: बजाज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
- गढ़वा: एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी
- लातेहार: टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
क्लस्टर आधारित होगी योजना
योजना को क्लस्टर आधारित मॉडल पर लागू किया गया है।
- धान के लिए ग्राम पंचायत को इकाई बनाया गया है।
- मकई के लिए प्रखंड को इकाई माना गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक ही भूमि का एक से अधिक बार बीमा नहीं कराया जा सकेगा। यदि किसी प्लॉट का कई बार पंजीकरण कराया जाता है, तो केवल पहला आवेदन ही मान्य माना जाएगा।
निष्कर्ष
कम बारिश और संभावित फसल नुकसान को देखते हुए झारखंड सरकार की बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। मात्र ₹1 के प्रीमियम पर बीमा और 80% तक मुआवजे की व्यवस्था किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









