सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में कई वर्षों से सरकारी विभागों में काम कर रहे चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों ने अब अपनी नियमित नियुक्ति की मांग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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याचिका में कर्मचारियों ने कहा है कि वे करीब 30 साल से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। उनका कहना है कि इतने लंबे समय तक काम करने के बावजूद अस्थायी कर्मचारी के रूप में रखना उनके साथ न्याय नहीं है।
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि नियमित नहीं होने की वजह से उन्हें वेतन, नौकरी की सुरक्षा और अन्य सरकारी सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए उन्होंने अदालत से उनकी लंबी सेवा को आधार मानते हुए नियमित करने की मांग की है।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की ओर से उनके वर्षों की सेवा का हवाला दिया गया। अब इस मामले में अदालत के अगले आदेश का इंतजार किया जा रहा है।इस मामले का फैसला सिर्फ याचिकाकर्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि झारखंड के उन हजारों अस्थायी कर्मचारियों के लिए भी अहम माना जा रहा है, जो लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।
मुख्य बातें
- चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों ने नियमितीकरण के लिए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
- कर्मचारियों का दावा है कि वे करीब 30 साल से लगातार सेवा दे रहे हैं।
- नियमित कर्मचारी का दर्जा और सभी सेवा लाभ देने की मांग की गई।
- मामले की सुनवाई जारी, हाईकोर्ट के अगले आदेश का इंतजार।
- फैसले का असर राज्य के अन्य अस्थायी कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है।









