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झारखंड मानव अधिकार संघ (JHRA) ने नगर निकाय चुनाव 2026 की मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी के खिलाफ उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क: झारखंड मानव अधिकार संघ (JHRA) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज मनोज किशोर (अध्यक्ष, जमशेदपुर) एवं दिनेश कुमार कीनू (प्रदेश अध्यक्ष) के संयुक्त नेतृत्व में पूर्वी सिंहभूम के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मुख्य राज्य निर्वाचन आयोग (झारखंड) एवं मुख्य निर्वाचन आयुक्त (भारत सरकार) को संबोधित है, जिसमें विगत 23/02/2026 को प्रदेश में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव 2026 के दौरान मतदाता सूची में व्याप्त गंभीर विसंगतियों और प्रशासनिक विफलताओं पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

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प्रमुख मुद्दे और विसंगतियां:

  • ज्ञापन में संघ ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान हुए निम्नलिखित गंभीर मुद्दों को रेखांकित किया है:
  • पारिवारिक बिखराव: एक ही घर में रहने वाले परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग वार्डों की मतदाता सूची में डाल दिए गए, जो प्रशासनिक लापरवाही का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
  • मतदाताओं का उत्पीड़न: लाखों खर्च और जागरूकता के दावों के बावजूद हजारों मतदाता शाम 5:00 बजे तक सही जानकारी या ‘वोटर स्लिप’ न मिलने के कारण एक वार्ड से दूसरे वार्ड भटकते रहे।
  • मतदान प्रतिशत में गिरावट: इस अव्यवस्था के कारण राज्य के लाखों नागरिक अपने संवैधानिक मताधिकार (अनुच्छेद 326) का प्रयोग करने से वंचित रह गए।

कानूनी संदर्भ और मांगें:

  • संघ ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 15, 32 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 166 एवं 166A का हवाला देते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रमुख मांगें निम्न हैं:
  • गलत भौतिक सत्यापन का दावा करने वाले BLO और सुपरवाइजरों पर विभागीय जांच हो।
  • वोटर स्लिप न पहुँचाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
  • सॉफ्टवेयर में ‘Address Matching’ एल्गोरिदम की विफलता की डाटा ऑडिट (Data Audit) कराई जाए।
  • लापरवाह अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में इस चूक को दर्ज किया जाए।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्य:

  • ज्ञापन सौंपने के दौरान निम्नलिखित सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे और हस्ताक्षरित किया:
  • मनोज किशोर ,अध्यक्ष, जमशेदपुर, दिनेश कुमार कीनू , प्रदेश अध्यक्ष, राजू कुमार गुप्ता, मनोज गुप्ता, श्रीशंकर महतो.
  • झारखंड मानव अधिकार संघ ने स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में ‘राइट टू वोट’ एक संवैधानिक अधिकार है और इसकी शुचिता से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
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