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Jharkhand Health Department Recruitment Controversy: वरीय अस्पताल प्रबंधक नियुक्ति पर विवाद, 28 गैर-MBBS अभ्यर्थियों के नाम के आगे लिखा ‘डॉ.’

By Tamishree Mukherjee

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सोशल संवाद / झारखण्ड : झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी वरीय अस्पताल प्रबंधक (Senior Hospital Manager) की नियुक्ति अधिसूचना नए विवाद में घिर गई है। 23 जून को जारी अधिसूचना में चयनित 29 अभ्यर्थियों में से 28 के नाम के आगे ‘डॉ.’ (डॉक्टर) लिखा गया है, जबकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिकांश चयनित अभ्यर्थी एमबीबीएस चिकित्सक नहीं हैं।

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इस मामले को लेकर जूनियर डॉक्टर नेटवर्क, झारखंड ने अधिसूचना पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे प्रशासनिक त्रुटि बताया है और सरकार से संशोधित अधिसूचना जारी करने की मांग की है।

नियुक्ति अधिसूचना पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

23 जून को जारी सूची में चयनित अभ्यर्थियों के नाम के आगे ‘डॉ.’ लिखा गया है। हालांकि, शॉर्टलिस्ट जारी होने के दौरान इन्हीं अभ्यर्थियों के नाम के साथ डॉक्टर की उपाधि नहीं थी। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि यदि चयनित अभ्यर्थी चिकित्सक नहीं हैं, तो उन्हें सरकारी दस्तावेज में डॉक्टर किस आधार पर लिखा गया।

विभागीय संकल्प और भर्ती विज्ञापन में अंतर

विवाद का दूसरा बड़ा कारण भर्ती प्रक्रिया में योग्यता संबंधी बदलाव है। जनवरी 2025 में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी संकल्प के अनुसार वरीय अस्पताल प्रबंधक पद के लिए एमबीबीएस अनिवार्य था। इसके साथ अस्पताल प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा या एमबीए जैसी अतिरिक्त योग्यता आवश्यक बताई गई थी।

लेकिन 20 जून 2025 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) द्वारा जारी भर्ती विज्ञापन में योग्यता का उल्लेख बदलकर एमबीबीएस/पीजी डिप्लोमा/एमबीए कर दिया गया। आरोप है कि इस बदलाव से यह संदेश गया कि इन तीनों में से किसी एक योग्यता वाले अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं, जबकि मूल विभागीय संकल्प में एमबीबीएस आवश्यक था।

जूनियर डॉक्टर नेटवर्क ने उठाए ये सवाल

जूनियर डॉक्टर नेटवर्क, झारखंड के अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार ने सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं—

  • चयनित अभ्यर्थियों की वास्तविक शैक्षणिक योग्यता क्या है?
  • क्या सभी चयनित उम्मीदवार एमबीबीएस अथवा मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्रीधारी हैं?
  • यदि नहीं, तो सरकारी अधिसूचना में उनके नाम के आगे ‘डॉ.’ क्यों लिखा गया?
  • यदि यह टंकण या प्रशासनिक त्रुटि है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?

‘डॉ.’ उपाधि के इस्तेमाल पर आपत्ति

जूनियर डॉक्टर नेटवर्क का कहना है कि सरकारी अधिसूचना एक आधिकारिक दस्तावेज होती है, इसलिए उसमें प्रयुक्त प्रत्येक शब्द का कानूनी और सामाजिक महत्व होता है। संगठन का कहना है कि ‘डॉ.’ जैसी पेशेवर उपाधि केवल उसी व्यक्ति के लिए इस्तेमाल की जानी चाहिए, जो इसके लिए विधिक रूप से पात्र हो। अन्यथा इससे चिकित्सा पेशे की गरिमा प्रभावित हो सकती है और आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

सरकार से मांगा गया स्पष्टीकरण

संगठन ने मांग की है कि यदि चयनित सभी अभ्यर्थी वास्तव में चिकित्सक हैं तो उनकी शैक्षणिक योग्यता सार्वजनिक की जाए। वहीं यदि अधिसूचना में त्रुटि हुई है तो इसे तत्काल संशोधित कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।

फिलहाल इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें विभाग के स्पष्टीकरण और संभावित संशोधित अधिसूचना पर टिकी हैं।

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