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झारखंड में शहरी भिखारियों की होगी पहचान, सर्वे व पुनर्वास की बड़ी पहल

By Aditi Pandey

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Jharkhand to identify urban beggars झारखंड

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सोशल संवाद/डेस्क: झारखंड सरकार ने शहरी इलाकों में भिक्षावृत्ति पर नियंत्रण के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी नगर निकायों में भिखारियों का सर्वे कराने का निर्देश जारी किया गया है। सर्वे के दौरान भिक्षावृत्ति पर निर्भर लोगों की पहचान की जाएगी, उनका डेटा तैयार होगा और उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

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सर्वे का काम स्वैच्छिक संगठनों की मदद से किया जाएगा। नगर विकास विभाग ने नगर निकायों को योग्य एनजीओ चयन करने को कहा है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि चयनित संस्थाओं का दर्पण पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है।

यह पूरी कवायद केंद्र सरकार की सपोर्ट फॉर मार्जिनलाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एंड इंटरप्राइजेज यानी स्माइल योजना के तहत की जा रही है। इस योजना में सर्वे, पहचान, समेकन, पुनर्वास और आश्रय गृहों के संचालन के लिए सहायता दी जाती है। सर्वे पूर्ण होने के बाद राज्यों को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से अनुदान उपलब्ध होगा।

सरकार की योजना है कि सर्वे में शामिल व्यक्तियों को केंद्र और राज्य की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाए। पात्र लोगों को व्यवसायिक प्रशिक्षण, रोजगार सहायता, कौशल विकास, शिक्षा और मेडिकल सपोर्ट दिया जाएगा ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड में लगभग 10,819 भिखारी दर्ज थे, जिनमें पुरुषों की संख्या 5,522 और महिलाओं की 5,297 थी। समय के साथ यह संख्या बढ़ी होने का अनुमान है, जो सरकार के लिए चुनौती भी है।

स्माइल योजना केवल सहायता तक सीमित नहीं है। इसका लक्ष्य भिखारियों और ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में लाना, आश्रय उपलब्ध कराना, पहचान पत्र बनवाना और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। सरकार का उद्देश्य आने वाले वर्षों में भिक्षावृत्ति को कम करना और शहरों को भिखारी-मुक्त बनाना है।

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